– रूस से कलपुर्जों और प्रणालियों की आपूर्ति होने में हो रही है देरी
– वायु सेना के 150 विमानों को ‘सुपर सुखोई’ में किया जाना है अपग्रेड
नई दिल्ली (हि.स.)। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने 07 अप्रैल को मरम्मत और ओवरहालिंग करने के बाद 100वां सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान भले ही वायु सेना को सौंप दिया है, लेकिन इस बेड़े को अपग्रेड करने में रूस-यूक्रेन युद्ध का असर साफ दिख रहा है। सुखोई के अपग्रेडेशन प्रोग्राम के तहत रूस से कलपुर्जों और प्रणालियों की आपूर्ति युद्ध की वजह से समय पर नहीं हो पा रही है। अब इसके बाद वायु सेना के ऑपरेशनल 260 विमानों में से 150 को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के अनुकूल ‘सुपर सुखोई’ के रूप में भी अपग्रेड किया जाना है।
एचएएल ने 07 अप्रैल को 100वें सुखोई विमान का सिग्नल आउट सर्टिफिकेट (एसओसी) वायु सेना के असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (इंजी ए) एयर वाइस मार्शल सरीन को सौंपा। सुखोई को अपग्रेड करने का कार्य वायु सेना ने खुद अपने महाराष्ट्र के नासिक जिले के ओझर में स्थित 11 बेस रिपेयर डिपो (बीआरडी) में शुरू किया था। बीआरडी ने पहला सुखोई फाइटर जेट मरम्मत और ओवरहालिंग करके अक्टूबर, 2018 में वायु सेना की ऑपरेशनल स्क्वाड्रन को सौंपा था। वायु सेना के पास इस समय 260 सुखोई-30 लड़ाकू विमान ऑपरेशनल हैं, जिन्हें एचएएल अपने नासिक डिवीजन में इनकी मरम्मत और ओवरहालिंग करके अपग्रेड कर रहा है।
अब इसके बाद 150 सुखोई फाइटर जेट को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के अनुकूल ‘सुपर सुखोई’ के रूप में अपग्रेड करने की योजना है, जिसके बाद भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इसके लिए वायु सेना को 4 बिलियन डॉलर की जरूरत है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने अपग्रेड प्रोग्राम के लिए पहले से ही प्रस्ताव दे रखा है, जिसे जल्द ही सरकार से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। एचएएल नोडल एजेंसी के रूप में लगभग 150 लड़ाकू विमानों को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के अनुकूल ‘सुपर सुखोई’ के रूप में अपग्रेड करेगी।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायु सेना मिलकर ‘सुपर सुखोई’ के लिए उपकरण और प्रणालियों को अंतिम रूप दे देंगे, जिसके बाद 150 विमानों को अपग्रेड किया जाएगा। ‘सुपर सुखोई’ कार्यक्रम की मंजूरी रूस से मिल चुकी है, क्योंकि सुखोई-30 एमकेआई भारत और रूस के संयुक्त उत्पाद हैं। सुखोई को अपग्रेड करने के लिए कई घटक और पुर्जे रूस से आने हैं। ‘सुपर सुखोई’ में एक आधुनिक कॉकपिट शामिल होगा। अपग्रेड के प्रमुख हिस्से में एवियोनिक्स और सेंसर भी शामिल हैं, जिससे 150 लड़ाकू विमानों को तकनीकी तौर पर पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के अनुकूल बनाया जाना है।
आधुनिकीकरण कार्यक्रम में कॉकपिट और सभी प्रणालियों में सुधार किया जाएगा। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि पायलटों के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में शिफ्ट होना आसान हो जाएगा। भारतीय रक्षा मंत्रालय और रूसी कंपनी साथ मिलकर आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत काम बांटने को अंतिम रूप देंगे, जिसके बाद तय होगा कि कौन सा कार्य भारत में होगा और कौन सा कार्य रूस में। ‘सुपर सुखोई’ में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं भी होंगी। सुपर सुखोई कार्यक्रम को भारतीय रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद प्रक्रिया के ऑफसेट नियमों के तहत कवर नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह उन्नयन परियोजना पिछले सुखोई-30 एमकेआई समझौते का ही एक हिस्सा है।
सुनीत/पवन
