नई दिल्ली (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मामले के आरोपित आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई टाल दी है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर, 2022 को ट्रायल कोर्ट से पूछा था कि ट्रायल पूरा में कितना समय लगेगा। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा था कि कार में सवार लोगों की पीट-पीट कर मारने के मामले में जांच का क्या स्टेटस है। आज सुनवाई के दौरान लखीमपुर खीरी के ट्रायल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले का ट्रायल पूरा करने में कम से कम पांच साल लगेगा।
यूपी सरकार ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं। तब कोर्ट ने कहा कि 200 गवाह हैं। 27 सीएफएसएल रिपोर्ट है, ऐसे में पांच साल लग जाएंगे। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इस केस में रोजाना सुनवाई की जरूरत है। ये गृह राज्यमंत्री से जुड़ा है। उन्होंने सबक सिखाने की बात कही थी। तब यूपी सरकार ने कहा कि गवाहों पर कोई हमला नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। घटना के दौरान आशीष कार में नहीं था। हाईकोर्ट ने एक साल पहले जमानत दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद जमानत को रद्द कर दिया था। जस्टिस सूर्यकांत को रोहतगी ने बताया था कि आशीष मिश्रा लगभग एक साल से ज्यादा समय से जेल में है।
रोहतगी ने कहा था कि प्राथमिकी में दावा किया गया है कि मिश्रा कार में थे, जबकि तथ्य यह है कि वह कार में नहीं थे। वहां बंदूक से कोई फायरिंग नहीं हुई थी, यह भी रिकॉर्ड में है। तथ्य यह है कि गोली लगने से किसी की मृत्यु नहीं हुई है, यह भी साक्ष्य में है। इतना ही नहीं, आशीष मिश्रा की लाइसेंसी बंदूक का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने आशीष मिश्रा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह प्रभावशाली व्यक्ति है। आशीष मिश्रा के पिता ने खुलेआम देख लेने की धमकी दी थी। पांच लोगों की हत्या हुई थी। इस मामले में एक गवाह पर एक दिन पहले ही हमला हुआ है। तब जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि यह तो ट्रायल का मामला है। दुष्यंत दवे ने इस मामले में राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था, जिसका विरोध करते हुए यूपी सरकार की वकील गरिमा प्रसाद ने कहा कि यह गलत आरोप लगाया जा रहा है।
आशीष मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 जुलाई को आशीष मिश्रा को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को आशीष मिश्रा को हाईकोर्ट से मिली जमानत को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद आशीष मिश्रा ने सरेंडर किया था।
लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में आठ लोगों की जान चली गई थी। इस मामले में एसआईटी आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपित बनाकर 3 जनवरी को लखीमपुर की कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
संजय/सुनीत
