Tuesday, March 31, 2026
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लखनऊ : सिखों के चौथे गुरु का श्रद्धा से मनाया गया प्रकाश पर्व

लखनऊ ( हि.स.)। सिखों के चौथे गुरु साहिब श्री गुरू रामदास महाराज का 487वां प्रकाश उत्सव शुक्रवार को श्रद्धा और सत्कार से लखनऊ के गुरूद्वारों में मनाया गया। इस पर गुरूद्वारों में दीवान सजाया गया और शबद-कीर्तन भी हुए। अंत में गुरू का लंगर भी वितरित किया गया ।

गुरूद्वारा, नाका हिन्डोला ऐतिहासिक श्री गुरू सिंह सभा गुरूद्वारा में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया। सुखमनी साहिब के पाठ से दीवान आरम्भ हुआ। हजूरी रागी भाई राजिन्दर सिंह ने आसा की वार का अमृतमयी कीर्तन कर निहाल कर दिया। रागी भाई हरितीरथ सिंह दिल्ली वालों ने भी अपनी मधुरवाणी में शबद किया।

मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी सुखदेव सिंह ने साहिब श्री गुरू रामदास महाराज के प्रकाश उत्सव पर व्याख्यान में कहा कि उनका जन्म 1534 को चूना मण्डी लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था। पिता का नाम श्री हरदास और माता का नाम दया कौर था। छोटी उम्र में गुरू के माता-पिता का निधन हो गया था। उनकी नानी उन्हें लेकर ‘बासरके‘ आ गयी। यहां आकर आपने घुंघनियां (उबला हुआ चना) बेचना शुरु कर दिया। वह श्री गुरु अमरदास के दर्शन कर तन-मन से उनकी सेवा करते रहे। गुरु की वाणी का सिमरन करते रहे। गुरु अमरदास ने उनको ‘गुरु का चक्क‘ बसाने का कार्य सौंपा।

सरोवर की खुदाई की थी

बाबा बुड्ढा को साथ लेकर उन्होंने पहले सरोवर की खुदाई की और नींव रखी। दुख भंजन बेरी के पास एक सरोवर बनवाया, जिसमें सच्चे मन से स्नान करने पर दुःख और रोग दूर हो जाते हैं। जो आज एक महान तीर्थस्थल (श्री अमृतसर) हरिमन्दिर साहिब के नाम से प्रसिद्ध है। जहां देश- विदेश से श्रद्धालू आकर दर्शन करते हैं। सच्चे मन से पवित्र सरोवर में स्नान करके दुःख एवं कष्टों से मुक्ति पाते हैं। दीवान की समाप्ति के बाद समूह संगत में गुरु का लंगर और मिष्ठान वितरित किया गया।

गुरूद्वारा, यहियागंज

ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादर साहिब , यहियागंज में विशेष दीवान सजाया गया । भाई वीर सिंह एवं भाई गुरमीत सिंह ने गुरुवाणी कीर्तन द्वारा संगतों को निहाल किया। ज्ञानी जगजीत सिंह ने गुरु के जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर गुरुद्वारा को विशेष प्रकार के फूलों एवं लाइटों से सजाया गया था। अंत में गुरु का अटूट लंगर वितरित हुआ।

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