Wednesday, February 18, 2026
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लखनऊ : शिक्षक संघ ने कहा 1621 शिक्षकों की जान गई, यूपी सरकार बता रही सिर्फ तीन की हुई मौत


लखनऊ । उप्र में हुए पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर लगाये गये षिक्षकों की कोरोना से हुई मौतों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। शिक्षक संघ ने दावा किया कि कोरोना संक्रमण के दौरान कराए गए इस चुनाव की वजह से 1621 कर्मचारियों की मौत हुई है। वहीं यूपी सरकार ने दावा किया है कि सिर्फ तीन शिक्षकों की ही मौत हुई है और उनके आश्रितों को 30-30 लाख रुपए की सहायता भी सुलभ करायी जा रही है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने 16 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखकर कहा कि राज्य के सभी 75 जिलों में पंचायत चुनाव ड्यूटी करने वाले 1621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों और कर्मचारियों की कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई है। राज्य सरकार के मुताबिक तीन शिक्षकों की मौत हुई है और उन्हें नियमानुसार अनुग्रह राशि का भुगतान जल्द ही कराया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसचिव सत्य प्रकाश ने कहा है कि भ्रामक व तथ्यों से विपरीत प्रकाशित खबरों से भ्रमित न हो और कोविड संक्रमण के रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सहयोग प्रदान करे।

वहीं पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान शिक्षकों की मृत्यु के आंकड़ों के मुद्दे पर सपा अध्यक्ष एवं उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि ‘‘उत्तर प्रदेश की निष्ठुर भाजपा सरकार मुआवजा देने से बचने के लिए अब ये झूठ बोल रही है कि चुनावी ड्यूटी में केवल तीन शिक्षकों की मौत हुई है, जबकि शिक्षक संघ का दिया आंकड़ा 1000 से अधिक है। भाजपा सरकार ‘महा झूठ का विश्व रिकॉर्ड’ बना रही है। परिवारवालों का दुख ये हृदयहीन भाजपाई क्या जानें।’’ उधर, कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट कर कहा कि ‘‘पंचायत चुनाव में ड्यूटी करते हुए मारे गए 1621 शिक्षकों की उत्तर प्रदेश शिक्षक संघ द्वारा जारी लिस्ट को संवेदनहीन यूपी सरकार झूठ कहकर मृत शिक्षकों की संख्या मात्र तीन बता रही है। शिक्षकों को जीते जी उचित सुरक्षा उपकरण और इलाज नहीं मिला और अब मृत्यु के बाद सरकार उनका सम्मान भी छीन रही है।’’
इस मामले में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने पलटवार करते हुए कहा है कि भ्रामक सूचना के आधार पर विपक्ष के नेता ओछी राजनीति कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी शिक्षकों की हुई मृत्यु 1621 बता रहें हैं, जो पूर्णतया गलत और निराधार है।

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