लखनऊ (हि.स.)। अपने आप में सबसे हटकर और अनोखा विषय ‘गर्भ संस्कार’ की पढ़ाई की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय में सोमवार को शुरू हो गयी। यह कोर्स भारत के किसी भी विश्वविद्यालय में अनोखा है। इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले विविध प्रकार के विद्यार्थी हैं, जिसमें परास्नातक कर चुके, शोध छात्र व रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं।
महिला अध्ययन संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय में पीजी डिप्लोगा इन गर्भ संस्कार के पाठ्यक्रम की शुरुआत राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की पहल पर की गयी। इसके लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय के सहयोग एवं प्रोत्साहन से संस्थान में गर्भ-संस्कार का कोर्स आरम्भ हुआ।
महिला अध्ययन संस्थान की कोर्डिनेटर, डा. अर्चना शुक्ला के अनुसार इसकी प्रथम कक्षा का संचालन सोमवार को किया गया। इसमें क्वीन मैरी, केजीएमयू लखनऊ की डा. अमिता पाण्डेय एवं अध्यात्मिक काउन्सलर, डा. शिवानी मिश्रा, ने गर्भ संस्कार कोर्स की महत्वता एवं इसकी समाज में आवश्यकता पर व्याख्यान दिया।
बताया कि इस कोर्स में विविध प्रकार के विद्यार्थी है, जिनमें कुछ स्नातक, परास्नातक, शोध -छात्र, छात्राएं, गृहिणीयां, आईवीएफ सेंटर संचालक, रिटायर्ड स्वास्थय विभाग कर्मी हैं। कोविड-19 काल में सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करने में समय लगा, जबकि कक्षाओं को करने में विद्यार्थियों ने अपना उत्साह दिखाया। कक्षा के संचालन के समय महिला अध्ययन संस्थान की कोर्डिनेटर, डा. अर्चना शुक्ला भी मौजूद रहीं। इस कोर्स में कुल 5 थेरोटिकल पेपर, 1 इर्टनशिप होगी। यह दो सेमेस्टर एक वर्ष का कोर्स है। किसी भी विश्वविद्यालय मंे यह एक अनोखा एवं नवीन कोर्स है।
