Saturday, February 14, 2026
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लखनऊ में पीपीपी मॉडल पर बनेंगे तीन हाईटेक बस अड्डे

-लखनऊ को छोड़कर प्रदेश के अन्य जिलों में बनेंगे 14 बस अड्डे

-परिवहन निगम प्रशासन ने टेंडर की शर्तों को सरल कर तीसरी बार टेंडर किया जारी

-आलमबाग बस टर्मिनल की तर्ज पर दो साल में बनकर तैयार होंगे हाईटेक बस अड्डे

लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) लखनऊ में तीन और प्रदेश के अन्य जिलों में 14 हाईटेक बस अड्डे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनाएगा। इसके लिए परिवहन निगम प्रशासन ने टेंडर की शर्तों को सरल कर तीसरी बार टेंडर जारी कर दिया है।

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम प्रशासन के मुताबिक, लखनऊ में तीन और प्रदेश के अन्य जिलों में 14 हाईटेक बस अड्डे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनाए जाएंगे। इस बार टेंडर की शर्तों को सरल कर टेंडर जारी किए गए हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा निवेशक हिस्सा ले सकें। टेंडर में हिस्सा लेने की अंतिम तारीख 20 सितम्बर है। सभी बस अड्डे लखनऊ के आलमबाग बस टर्मिनल की तर्ज पर बनाए जाएंगे। इन बस अड्डों पर यात्री सुविधाओं के साथ शॉपिंग मॉल भी बनाए जाएंगे।

लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में बनेंगे हाईटेक बस अड्डे

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम पीपीपी मॉडल पर लखनऊ के चारबाग बस स्टेशन, गोमती नगर विभूति खंड, अमौसी बसों की कार्यशाला के अलावा कानपुर के झकरकटी, कौशांबी, वाराणसी कैंट, प्रयागराज सिविल लाइन और जीरो रोड, मेरठ में सोहराब गेट, आगरा में ईदगाह, आगरा फोर्ड, ट्रांसपोर्ट नगर, अलीगढ़ के रूहेलखंड, मथुरा, गाजियाबाद, गोरखपुर और सहिबाबाद में हाईटेक बस अड्डे बनाए जाएंगे।

टेंडर की शर्तों में तीन तरह के किए गए मुख्य बदलाव

परिवहन निगम प्रशासन के अनुसार इसके पहले टेंडर लेने वाली कंपनी को डेढ़ साल में हाईटेक बस अड्डे बनाकर देना था, अब दो साल में बनाकर देना होगा। पहले बस अड्डे को 30 साल के लिए लीज पर दिया जाना था। अब 60 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा। पूर्व में पीपीपी मॉडल पर बनने वाले बस अड्डों पर शॉपिंग मॉल पांच साल में बनाना था। अब शॉपिंग मॉल सात साल में बनाकर देना होगा।

कई वर्षों से हो रहा है हाईटेक बस अड्डे बनाने का प्रयास

परिवहन निगम प्रशासन बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर बनाने की कोशिश कई वर्षों से कर रहा था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसके पहले जो सेवा शर्तें थीं उस कारण से भी निवेशक नहीं मिल सके थे। अब देखना है कि नई टेंडर शर्तों को निवेशक कितना पसंद करते हैं।

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