लखनऊ (हि.स.)। उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल की करीब 70 प्रतिशत ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ के एस्काॅर्ट (सुरक्षा दल) टीम की संख्या कम कर दी गई है। चुनाव ड्यूटी में जाने की वजह से अब सिर्फ 30 प्रतिशत संवेदनशील ट्रेनों में ही आरपीएफ और जीआरपी के एस्काॅर्ट मुस्तैद रहेंगे।
उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल की करीब 80 ट्रेनों में जीआरपी और आरपीएफ एस्काॅर्ट टीम की तैनाती रहती है। इनमें से अधिकांश रात में चलने वाली ट्रेनें हैं। एस्काॅर्ट टीम लखनऊ से गाजियाबाद, झांसी, वाराणसी और गोरखपुर सहित कई रूटों पर रात की ट्रेनों में चलती है। एस्काॅर्ट में जीआरपी और आरपीएफ सिपाही के अलावा सब इंस्पेक्टर भी रहते हैं, जो चलती ट्रेन में अपराधिक घटना रोकने के लिए सतर्क रहते हैं। इनकी मॉनिटरिंग भी शीर्ष अधिकारी करते हैं। प्रतिदिन एस्काॅर्ट की रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसमें ट्रेन में हुई किसी अपराधिक घटना की जानकारी भी देनी पड़ती है।
उत्तर रेलवे की लखनऊ मंडल की 70 प्रतिशत ट्रेनों से
जीआरपी और आरपीएफ की एस्काॅर्ट टीमों को हटाकर चुनाव ड्यूटी पर भेजा गया है। चुनाव ड्यूटी में जाने की वजह से लखनऊ जंक्शन और चारबाग सहित सभी बड़े स्टेशनों पर मौजूदा जीआरपी जवानों की संख्या कम हो गयी है। ऐसे में अब जीआरपी के मौजूदा जवानों को केवल उन ट्रेनों में लगाने का निर्णय लिया है, जिनमें अपराध की सबसे अधिक घटनाएं होती हैं।
पुलिस अधीक्षक रेलवे सौमित्र यादव का कहना है कि चुनाव ड्यूटी में जीआरपी जवानों को भेजा गया है। इस कारण एस्काॅर्ट बल में कमी आ गई है। जीआरपी अब उन ट्रेनों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रही है। जिनमें अपराध की सबसे अधिक घटनाएं होती हैं।
दरअसल, एस्कॉर्ट टीम यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेनों में तैनात की जाती हैं। एस्कॉर्ट टीम में तीन से चार जवान होते हैं, जो चलती ट्रेन में यात्रियों के साथ होने वाली किसी घटना की सूचना तुरंत संबंधित थाने को देते हैं और कार्रवाई भी करते हैं। एस्कॉर्ट के पास एफआईआर रजिस्टर भी होता है। इसके अलावा यदि कोई यात्री रेलवे हेल्पलाइन नम्बर पर फोन करता है तो उस सूचना को भी एस्कॉर्ट तक पहुंचाया जाता है। साथ ही संबंधित यात्री की सहायता करने के निर्देश भी दिए जाते हैं।
दीपक
