लखनऊ ( हि.स.)। मौसम ने करवट बदल ली है। इसके साथ ही बाजार की तस्वीर भी बदली-बदली सी लगने लगी है। दिन में धूप तो रात में ठंडक का अहसास होने लगा है। सूर्यास्त भी जल्दी होने लगा है। लोगों ने अपने घरों के एसी बंद कर दिए हैं। शहर की बाजारों में अब गरम भुनी मूंगफली, उबले सिंघाड़े, गुड़ की गजक, गुड़ की पट्टी, कमरे में बिछाने की कालीनें और रजाई-गद्दों की दुकानें भी सजा गई है। गरम जैकेट भी बिकने लगी हैं।
शहर में ठंडक ने दी दस्तक
शहर में करवा के बाद लोगों को अब ठंड का अहसास होने लगा है। शहर की निशातगंज, भूतनाथ, कपूरथला सहित दूसरी बाजारों में ताजी गरम भुनी मूंगफली, उबले सिंघाड़े लोगों को ललचाने लगे।
15 रु. की सौ ग्राम मूंगफली
मूंगफली 15 रुपये की सौ ग्राम बिक रही है। मूंगफली बेचने वाले ने बताया कि अक्टूबर से फरवरी तक मूंगफली बिकती है। इसे गरीबों का बादाम भी कहते है। मूंगफली सिटी स्टेशन के पास मण्डी से थोक के भाव लाते हैं।
25 रुपये के 250 ग्राम सिंघाड़े
ठेले पर सिंघाड़े बेचने वाले राजाराम ने बताया कि अक्टूबर से नये साल तक सिंघाड़ा बिकेगा। 25 रुपये के 250 ग्राम के भाव से मिल रहे है। हरी चटनी के साथ देते हैं। उबले सिंघाड़े हरी चटनी के साथ बहुत लोग पसंद करते हैं।
रजाई- गद्दों की दुकानें भी सज गईं
रजाई-गद्दों को भरने वाले ने बताया कि रुई के दाम 150 रु. से 180 रु. प्रति किलो तक हैं। उसने बताया कि 15 अक्टूबर से जनवरी तक सीजन चलता है। रुई गरम होती है, जाड़े में इसका लिहाफ गरम करता है।
कालीन भी बिकने लगी
कमरे में बिछाने वाली कालीन और बेड के नीचे वाली पट्टी भी मिल रही। 400 से 1200 रुपये तक में कालीन-पट्टे मिल रही है। जाड़े में कमरे में रंग-बिरंगी कालीनें जहाँ देखने में अच्छी लगती है वहीं ठंडी फर्श में शरीर को ठंड से बचाती भी है।
बिकने लगी गरम जैकेट
जैकेट भी बिकने लगी हैं। दुकानदार ने बताया कि बंगाल से मंगाते है। 350 रुपये की एक जैकेट है। पूरी लाट मंगाते है। लोग खरीदने भी लगे हैं।
गजक की मिठास भी फैलने लगी
गुड़ और सफेद तिल की गजक का जाड़े में लखनऊ के लोगों को इंतजार रहता है। गुड़ और मूंगफली की गजक मिलती है। इसके अलावा रेवड़ी, खुशियां, गुड़ की पट्टी भी बिकनी शुरू हो गयी है।
