लखनऊ(हि.स.)। देवा रोड पर नौबस्ता कलां के ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को कभी सिंचाई के लिए जल देने वाली नौबस्ता कलां नहर आजकल अपने पुनर्जन्म की प्रतीक्षा में है।
लखनऊ के बदले भूगोल में वर्ष 2019 में नौबस्ता कलां का ग्रामीण क्षेत्र से नगर निगम क्षेत्र में आ गया। इसका कारण यह भी रहा कि बड़ी संख्या में खेती करने वाली जमीनों पर कालोनियां बन चुकी थी और नौबस्ता कलां में खेती के नाम पर मात्र 18 प्रतिशत जमीन ही शेष रह गयी थी। इसके बाद सिंचाई विभाग की माइनर कनाल नौबस्ता कलां नहर को लोक निर्माण विभाग को स्थानान्तरित भी कर दिया गया था।
नौबस्ता कलां ग्रामीण क्षेत्र से हिम सिटी कालोनी तक सफर देखने वाले शिवानन्द बताते हैं कि पहले गांव हुआ करता था और चारों ओर खेती होती थी। उस वक्त नौबस्ता कलां माइनर नहर के पानी से ही खेतों तक पानी पहुंचता था। दो दशक में ये क्षेत्र बदल गया और किसानों की जमीन को कालोनाइजरों ने खरीद कर वहां बड़ी छोटी कालोनियां बनाना शुरु कर दिया।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में जब वह हिम सिटी में जमीन का टुकड़ा खरीदे थे, तभी से अभी तक जमीन के रेट में तीन गुना का अंतर आ चुका है। तेजी से जमीनों की बिक्री हुई है। इस क्षेत्र में हिम सिटी के अलावा पीताम्बरा कालोनी, सूर्या बिहार कालोनी जैसी बड़ी कालोनियां है। जिसे फेस एक, दो, तीन तक बनाया गया है। तेजी से बन रही कालोनियों के कारण सड़क की आवश्कता है और भविष्य में नौबस्ता कलां नहर पर सड़क बनने की उम्मीद जतायी जा रही है।
चिनहट नहर का भी यही हाल
नौबस्ता कलां नहर से मात्र दो किलोमीटर के दायरे में चिनहट माइनर नहर का भी यही हाल है। चिनहट क्षेत्र में पूरी तरह से शहरीकरण हो जाने के बाद यहां बनी माइनर नहर पर अतिक्रमण भी हो रहा है। तो वहीं कुछ एक जगहों पर पटरी दुकानें लगी हुई भी मिलती है।
नहर की आवश्यकता हुई शून्य
नौबस्ता कलां से जुड़े अमराई गांव, गोइला गांव, मुरलीपुर गांव जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में नाम मात्र की खेती हो रही है। जहां पम्पिंग मशीन के माध्यम से भूजल निकालकर खेती में उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में खेती किसानी करने वाले किसानों के बीच नहर की आवश्यकता शून्य हुई है।
कालोनाइजर के बढ़ते कदम
नौबस्ता की सीमा से जुड़े अमराई गांव, सुगामऊ गांव को छोड़ दिया जाये तो आसपास के क्षेत्रों में कालोनाइजर के कदम बढ़े है। सुगामऊ से चांदन गांव की ओर बढ़ने पर तो गांव का कोई हिस्सा बचा ही नहीं है।
शरद/मोहित
