लखनऊ(हि.स.)। लखनऊ में बुंदेलखंड की लाल मूंगफली का इंतजार समाप्त हो गया है। शहर में लाल मूंगफली के आने से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी है। खाने में मीठी लगने वाली लाल मूंगफली के ठेले दिखने शुरू हो गये हैं और लोग इसे चाव से खा रहे हैं।
लाल रंग की मूंगफली देखते ही बुंदेलखंड की मिट्टी ध्यान आने लगती है। लखनऊ में हर साल लाल मूंगफली का इंतजार किया जाता है। लाल मूंगफली की खासियत इसके मुलायम दाने और मिठास हैं।
लखनऊ में सीतापुर रोड पर मूंगफली वाली गली और लखनऊ सिटी स्टेशन के निकट मूंगफली बाड़ा में मूंगफली की खरीदारी वर्षभर होती है। दोनों ही स्थानों पर लाल मूंगफली का इंतजार समाप्त हो गया है और भीगे मौसम में 150 रुपये प्रतिकिलो लाल मूंगफली बाजार में उपलब्ध हो गयी है।
बुंदेलखंड के किसानों की मेहनत और पहाड़ी क्षेत्र की लाल मिट्टी का मिश्रण एक साथ लाल मूंगफली में मिलता है। बुंदेलखंड के कृषि विश्वविद्यालय ने मूंगफली की सर्वाधिक उपज कराने का प्रयास कर बुंदेलखंड के 150 किसानों में मूंगफली का बीज वितरण किया। जिसके फलस्वरूप उत्तम और स्वस्थ मूंगफली तैयार हुई है।
लखनऊ की मूंगफली वाली गली के व्यापारी राकेश ने बताया कि बुंदेलखंड में विशेष रूप से झांसी से आने वाली लाल मूंगफली का इंतजार सभी लोगों को रहता है। इसके दाने करारे होते हैं और खाने में एक गजब की मिठास होती है।
बताया कि वह होलसेल में मूंगफली मंगवाते हैं और उनके पास से फुटकर बेचने के लिए सैकड़ों दुकानदार ले जाते हैं। फुटकर में 40 रुपये पाव के हिसाब से मूंगफली बिकती है। जो इस वक्त बाजार में उपलब्ध हो चुकी है और इसकी मांग भी ज्यादा हो रही है।
शरद
