गाजियाबाद(हि.स.)। एनसीआरटीसी आरआरटीएस कॉरिडॉर के प्रथम डिपो, दुहाई डिपो को ईको फ्रेंडली डिपो के रूप में विकसित कर रहा है। इसके लिए दुहाई डिपो में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (वर्षाजल संचयन तंत्र), बड़े पैमाने पर स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही ग्रीन ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रशासनिक भवन में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे। डिपो के अंदर पर्याप्त ग्रीनरी के लिए कई पेड़ पौधे लगाए जाने की भी योजना है।
एनसीआरटीसी के प्रवक्ता पुनीत वत्स ने बताया कि गाज़ियाबाद के दुहाई में निर्माणाधीन दुहाई डिपो लगभग 15 हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है। यहां वर्षा जल के संचयन के लिए एक प्रभावी तंत्र तैयार किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत डिपो में वर्षा जल संचयन के लिए 22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स बनाए जा रहे हैं। इस तंत्र की मदद से वर्षा जल को बेहतर ढंग से संग्रहित कर भूमि के भूजल स्तर को बढ़ाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि इन सभी 22 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट्स का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। वर्षा जल से अपशिष्ट पदार्थों को अलग करने के लिए इन पिट्स के साथ ही छन्नी युक्त डी-सल्टिंग चैंबर भी बनाए जा रहे हैं। डिपो के सभी ड्रेन को इन डी-सल्टिंग चैंबर से जोड़ा जाएगा। वर्षा जल पहले ड्रेन के जरिये डी-सल्टिंग चैंबर में छन्नी से फिल्टर हो जाएगा और फिर स्वच्छ वर्षाजल रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट में पहुंचेगा।
श्री वत्स ने बताया कि दुहाई डिपो में एक प्रशासनिक भवन भी बनाया गया है। इसके साथ ही यहां आरआरटीएस ट्रेनों के लिए स्टेबलिंग यार्ड भी बनाए गए हैं। ग्रीन ऊर्जा के उत्पादन के लिए दुहाई डिपो के भवनों की छतों पर सौर पैनल लगाए जाएंगे। प्रशासनिक भवन के ऊपरी फ्लोर पर सोलाट्यूब के माध्यम से सोलर लाइट का भी प्रयोग किया गया है।
उन्होंने बताया कि दुहाई डिपो को हरा-भरा बनाने के लिए भी एनसीआरटीसी कार्य कर रहा है। लैंडस्केपिंग कार्यों के तहत यहां अलग-अलग किस्म के पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो चुका है। इस क्रम में यहां अब तक लगभग 200 पौधे लगाए जा चुके हैं। यहां बड़े वृक्षों के साथ ही फल और फूल के पौधे भी लगाए जाएंगे।
स्वच्छ और हरित पर्यावरण की दिशा में योगदान करने के अपने दृष्टिकोण के तहत, एनसीआरटीसी सभी आरआरटीएस स्टेशनों, डिपो और अन्य भवनों के लिए आईजीबीसी सर्टिफिकेशन की उच्चतम रेटिंग करने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए इन सभी एनसीआरटीसी संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन), सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, लैंडस्केपिंग, ग्रीन बेल्ट आदि विकसित किये जाएंगे। इनमें प्रकाश के लिए एलईडी लाइटें होंगी, ए.सी पर्यावरण के अनुकूल होंगे, वेंटिलेशन व नेचुरल हवा के लिए खिड़कियां और अन्य बुनियादी ढांचे भी निर्मित किए जाएंगे।
फरमान अली
