Sunday, April 12, 2026
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रूस का यूक्रेन पर हमला: एक साल में तीन लाख से अधिक मौतें, लाखों लापता, दर्जनों तबाह शहर

कीवरी (हि.स.)। यूक्रेन पर रूस के हमले का एक साल पूरा हो गया है। इस एक साल में तीन लाख से अधिक मौतें हुई और यूक्रेन के दर्जनों शहर तबाह हो गए हैं। इस दौरान लाखों की संख्या में लोग लापता और विस्थापन का दर्द झेलने को विवश हैं। युद्ध अभी भी जारी है और दोनों ओर से तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है।

24 फरवरी 2022 की सुबह अचानक यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के शहरों पर रूसी सेना ने आक्रमण कर दिया था। हमला होते ही पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। यूक्रेन को नाटो देशों का साथ मिला और अमेरिका, ब्रिटेन, पोलैंड, फ्रांस समेत कई देशों ने युद्ध से बाहर रहते हुए यूक्रेन को मदद पहुंचानी शुरू कर दी। रूस को अलग-थलग करने की तमाम अंतरराष्ट्रीय कोशिशों के बीच युद्ध एक साल लंबा खिंच चुका है। इस दौरान तीन लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। दावा है कि इनमें सवा लाख के आसपास यूक्रेन के जवान हैं तो दो लाख के आसपास रूसी सैनिक मारे गए या लापता हैं।

युद्ध की चपेट में आकर सात हजार से ज्यादा यूक्रेन के वे अलगाववादी नेता भी मारे गए हैं, जो रूस का साथ दे रहे थे। दोनों तरफ के दो लाख से ज्यादा जवान व नागरिक लापता हैं। वहीं, लाखों लोग लापता होने के साथ विस्थापन का दर्द सहने को विवश हैं। यूक्रेन पर हमले के बाद इन लोगों ने आसपास के देशों में शरण ली है। युद्ध ने 44 विदेशी नागरिकों की जान भी ली है, जिनमें एक भारतीय छात्र शामिल है। युद्ध में मारे गए विदेशियों में सर्वाधिक 12 नागरिक ग्रीस और आठ नागरिक अजरबैजान के हैं।

रूसी हमले के विरोध में अमेरिका समेत दुनिया के कई देश यूक्रेन के साथ आ गए। अभी दुनिया के 80 से ज्यादा देशों से यूक्रेन को अलग-अलग तरह से मदद मिल रही है। इनमें 31 देश ऐसे हैं, जो यूक्रेन को घातक हथियार और मिसाइलें दे रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन सोमवार को ही यूक्रेन पहुंचे थे। यहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। इसके अलावा ब्रिटेन, फ्रांस समेत कई अन्य देशों के राष्ट्रपति और राष्ट्राध्यक्ष भी यूक्रेन का दौरा कर चुके हैं।

इस युद्ध में अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े देश यूक्रेन की मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों ने गुरुवार को यूक्रेन के लिए इस समूह की ओर से आर्थिक सहायता बढ़ाकर 39 अरब डॉलर कर दी है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मार्च तक इस देश को नया वित्तीय पैकेज देने का आह्वान भी किया ताकि उसे रूस के हमले के प्रभाव से निपटने में मदद मिल सके। जी-7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, कनाडा, जापान और अमेरिका शामिल हैं।संजीव मिश्र

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