लखनऊ (हि.स.)। भाजपा का गढ़ मानी जानी वाली अयोध्या जिले की रूदौली विधान सभा सीट कभी समाजवादियों का गढ़ हुआ करती थी। प्रखर समाजवादी नेता स्व. राम सेवक यादव भी रूदौली विधान सभा से विधायक रह चुके हैं। राम सेवक यादव वर्ष 1974 में रूदौली से विधायक निर्वाचित हुए थे। हालांकि इससे पहले वह बाराबंकी के सांसद रह चुके थे। इसके बाद जनता पार्टी के टिकट पर प्रदीप यादव विधायक बने। बसपा के उदय के बाद लगातार बसपा ने यहां पर अपना प्रत्याशी उतारा लेकिन रूदौली में बसपा कभी नहीं जीती।
रूदौली में सर्वाधिक छ: बार भाजपा, एक बार जनसंघ व तीन बार जनसंघ के समर्थन से विधायक जीते। इसके अलावा तीन बार कांग्रेस , तीन बार सपा व एक बार निर्दलीय प्रत्याशी ने भी जीत दर्ज की है।
रूदौली की खास बात यह रही है कि आजादी के बाद अब तक कोई भी जन प्रतिनिधि तीन बार विधायक नहीं बना है। रूदौली में अब तक सर्वाधिक लोकप्रिय माने जाने वाले नेता प्रदीप यादव भी यहां से दो बार ही विधायक बने। भाजपा से रामदेव आचार्य, सपा से अब्बास अली जैदी रूश्दी मियां भी दो बार विधायक रहे। वर्तमान में भाजपा से प्रत्याशी राम चन्द्र यादव का विधायक के रूप में दो कार्यकाल पूरा हो चुका है।
हैट्रिक लगाने की फिराक में राम चन्द्र यादव
इस बार रूदौली में भाजपा से मौजूदा विधायक राम चन्द्र यादव,सपा से पूर्व मंत्री आनन्द सेन यादव और बसपा से पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी रूश्दी मियां के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। सपा प्रत्याशी आनन्द सेन यादव अपने पिता स्व. मित्रसेन यादव की विरासत और समाजवादी वोट बैंक यादव और मुस्लिम मतदाताओं के सहारे जीत की आस लगाये हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी अब्बास अली जैदी रूश्दी मियां दलित और मुस्लिम गठजोड़ के सहारे चुनाव जीतना चाहते हैं।
भाजपा प्रत्याशी राम चन्द्र यादव विकास व सुशासन के बल पर चुनाव मैदान में हैं। अगर 2022 के विधान सभा चुनाव में यहां से बसपा के रूश्दी मियां या भाजपा के रामचन्द्र यादव जीतते हैं तो वह रूदौली से तीसरी बार विधायक बनेंगे। क्योंकि रूश्दी मियां दो बार विधायक रहे और वर्तमान विधायक राम चन्द्र यादव का भी दो कार्यकाल पूरा हो चुका है। इन दोनों में से कोई भी जीतता है तो रूदौली के इतिहास में एक नई कड़ी जुड़ जाएगी।
सपा-भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है बसपा
रूदौली में भले ही बसपा कभी नहीं जीती लेकिन इस बार बसपा सपा और भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है।सपा व भाजपा दोनों दलों से प्रत्याशी यादव बिरादरी से हैं। ऐसे में यादव मतदाताओं का विभाजन तय माना जा रहा है। अगर यादव मतदाताओं में बिखराव हुआ तो इसका सीधा फायदा बसपा को होगा। यादव व दलित बाहुल्य रुदौली विधानसभा में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस सीट पर जब भी मुस्लिम मतों का बंटवारा हुआ तो भाजपा प्रत्याशी जीता। वर्ष 2012 और वर्ष 2017 में सपा और बसपा से मुस्लिम प्रत्याशी रहे इसका फायदा भाजपा को हुआ और दोनों बार भाजपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
दिग्गज बसपाई भी यहां से हार चुके हैं चुनाव
रूदौली विधान सभा में एक लाख के करीब दलित मतदाता हैं। कई बार बसपा यहां दूसरे स्थान पर रही लेकिन जीत दर्ज नहीं कर सकी। रूदौली विधान सभा से जिले के दिग्गज नेता अशोक सिंह,एहतराम अली तम्मू और गब्बर खां भी दमदारी के साथ चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा।
रूदौली में सपा-बसपा के बीच होगा मुकाबला
रूदौली प्रथम से निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य बलराम यादव ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि यहां पर सपा और बसपा के मध्य सीधा मुकाबला है। रूदौली विधान सभा में भाजपा लड़ाई से बाहर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि सेन परिवार के प्रति रूदौली के मतदाताओं की आस्था है। सपा प्रत्याशी आनन्द सेन यादव के पिता स्व. मित्रसेन यादव कई सांसद रह चुके हैं। सभी जाति बिरादरी में उनको मानने वाले लोग हैं। क्षेत्र में जनता का भरपूर समर्थन उन्हें मिल रहा है।
बृजनन्दन
