– उर्वरा शक्ति न्यून स्तर पर,कृषि वैज्ञानिक चिंतिंत
-कृषि भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के चौंकाने वाले परिणाम
गाजियाबाद(हि.स.)। रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग के कारण जिले की खेतिहर जमीन की उर्वरा शक्ति न्यून स्तर पर आ गयी है जिसके कारण बहुत तेजी के साथ यहां की जमीन बंजर होनी शुरू हो गई है। इससे कृषि वैज्ञानिक भी चिंतिंत हो उठे हैं। उनका कहना है कि यदि किसान अभी भी नहीं चेते तो खेतिहर जमीन के बंजर होने में देर नहीं लगेगी।
जिला मुख्यालय पर स्थित कृषि भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के परिणाम इस तथ्य की पुष्टि कर रहे हैं। प्रयोगशाला ने कृषि भूमि परीक्षण के परिणामों के माध्यम से यह साफ कर दिया गया है कि जिले की खेतिहर जमीन में किसान ज्यादा पैदावार लेने के लालच में मापदंड से अधिक रासायनिक खादों का प्रयोग कर रहे हैं और इस जमीन में गोबर व हरि खाद का प्रयोग नाम मात्र का ही कर रहे है। जिसके चलते यह जमीन ऊसर यानी बंजर में तब्दील होनी शुरू हो गई है।
कृषि भूमि परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया कि प्रयोगशाला में जो प्रगतिशील किसान अपने खेतों की मिट्टी जांच कराने के लिए आते हैं, उनकी जांच रिपोर्ट में पोषक तत्वों की बड़े पैमाने पर कमी पाई गई है । इस कृषि भूमि में ऑर्गेनिक कार्बन की उपलब्धता न्यून तक पहुंच गई है। मानकों के अनुरूप एक स्वस्थ भूमि के लिए ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा 0.80 होनी चाहिए लेकिन यह घट कर 0.2 से 0.2 50 के न्यून स्तर पर पहुंच गई है। उनका कहना है इसकी वजह यह है कि आजकल किसानों ने हरी खाद और पशुओं के गोबर खाद का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया है। जिस कारण धरती में पोषक तत्वों की कमी लगातार नजर आ रही है । कृषि भूमि प्रयोगशाला अध्यक्ष ने बताया कि इसी तरह खेतिहर जमीन में सल्फर और जिंक की भी काफी कमी हो रही है और फसल जितनी होनी चाहिए उसमें उतना फसली उत्पादन नहीं हो पा रहा है । उनका कहना है कि इन पोषक तत्वों में घटाने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार यूरिया व डाई जैसे रासायनिकउर्वरक हैं ।
प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इन पोषक तत्वों की कमी के कारण फसल पर विपरीत असर पड़ता है ऑर्गेनिक सल्फर कम होने से जहां फसल बढ़ नहीं पाती। यहां तक की जमीन ऊसर हो जाती है। जबकि सल्फर और जिंक की कमी होने से फसल की बढ़वार कम होने के साथ-साथ पौधा पीला और कमजोर हो जाता है। उनका कहना है कि यह स्थिति बहुत खतरनाक है इसलिए किसानों को गोबर की खाद हरी खाद का इस्तेमाल भी करना चाहिए ।
केवल जागरूक किसान ही कराते हैं मिट्टी की जांच
कृषि भूमि प्रयोगशाला के अध्यक्ष रविंद्र कुमार ने बताया कि किसानों में जागरूकता की कमी के कारण किसान बहुत कम संख्या में मिट्टी का परीक्षण कराते हैं ।उन्हें नहीं मालूम कि खेत की मिट्टी का परीक्षण समय समय पर आना चाहिए ताकि पता चल सके कि उनके खेत में किस पोषक तत्व की कमी है । उन्होंने बताया कि जागरूकता की कमी के कारण जिले में 15 से 20 किसान ही अपने खेतों की मिट्टी का नमूना लेकर आते हैं। उन्होंने बताया कि किसानों में जागरूकता लाने के लिए शासन के आदेश पर हमने किसानों की पाठशाला कार्यक्रम शुरू की है जिसमें किसानों की जागरूक किया जाएगा।
