– महाराष्ट्र में ब्लैक फंगस संक्रमण के सर्वाधिक मामले, गुजरात में सर्वाधिक मौत
पवन कुमार अरविंद
नई दिल्ली (हि.स.)। कोरोना महामारी के बीच बढ़ रहे ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस के खतरे ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। देशभर में अब तक इससे 2500 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। ब्लैक फंगस के सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में सामने आए हैं, जबकि सर्वाधिक 60 मौतें गुजरात में हुई हैं। इसके अवाला मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, झारखंड, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी यह बीमारी पहुंच चुकी है। दुर्लभ किस्म की यह बीमारी अधिकतर कोरोना संक्रमण से उबरे मरीजों में तेजी से फैल रही है। इस बीमारी से अब तक कई लोग अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं।
गुजरात में अभी तक ब्लैक फंगस के 700 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। राज्य में इस बीमारी से अभी तक 60 मरीजों की मौत हुई है। इसमें सर्वाधिक 20 मौतें अहमदाबाद में हुई हैं, जबकि सूरत में 16, वडोदरा में 15 और सौराष्ट्र में 9 मरीजों ने जान गंवाई है। राज्य में 15 से ज्यादा रोगियों ने अपनी आंखें गंवाई हैं। सूरत में 150 रोगियों का इलाज चल रहा है। सूरत के 3 अस्पताल में अभी तक 91 ऑपरेशन किया गया है, 16 रोगियों की मौत हुई है और 10 रोगियों की आंख निकालनी पड़ी है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को ब्लैक फंगस के उपचार केंद्र के रूप में उपयोग करने का निर्णय लिया है। राज्य में कम से कम आठ मरीजों की एक आंख की रोशनी चली गई है। ठाणे जिले में बुधवार को दो मरीजों ने दम तोड़ दिया था। राज्य में अब तक ब्लैक फंगस से 52 मरीजों की मौत हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा और आगरा जिले में भी ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं। मथुरा जिले में दो मरीजों में दो दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने ब्लैक फंगस की पुष्टि की थी। जिले के प्रेमगली वनखंडी वृंदावन निवासी 72 वर्षीय वृद्ध महिला और मानसनगर महोली रोड निवासी युवक के ब्लैक फंगस से संक्रमित होने का मामला सामने आया था। युवक को आंखों से दिख नहीं रहा था। युवक की आंखों का ऑपरेशन कराया गया है। आगरा जिले में भी दो दिन पहले एक मरीज में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई थी। प्रदेश में शुक्रवार को कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
राजस्थान में पिछले एक सप्ताह में ब्लैक फंगस के 80 से 100 मरीज सामने आए हैं। यह जानकारी निजी क्लीनिक जैन ईएनटी के डॉक्टर सतीश जैन ने दी है। राज्य सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई ऑफिशियल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। मौतों को लेकर भी कोई ऑफिशल वर्जन नहीं दिया गया है। डॉक्टर सतीश जैन ही मरीजों के ऑपरेशन कर रहे हैं। फिलहाल एक-दो दिन में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस संबंध में चिंता जाहिर करते हुए गुरुवार को एक ट्वीट किया था। मुख्यमंत्री गहलोत ने लिखा था- राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों में ब्लैक फंगस के मामले सामने आना बहुत चिंताजनक है।
ब्लैक फंगस के लक्षण म्यूकरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस या काली फफूंद एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। ये म्यूकर फफूंद के कारण होता है जो आमतौर पर मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्जियों में पनपता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार ब्लैक फंगस की पहचान इसके लक्षणों से की जा सकती है। इसमें नाक बंद हो जाना, नाक एवं आंख के आसपास दर्द व लाल होना, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस फूलना, खून की उल्टियां, मानसिक रूप से अस्वस्थ होना शामिल है। यह कोरोना संक्रमित उन मरीजों पर सबसे ज्यादा अटैक कर रहा है, जिनको शुगर की बीमारी है। यह इतनी गंभीर बीमारी है कि मरीजों को गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती करना पड़ रहा है। ब्लैक फंगस के किसी भी लक्षण को हल्के में ना लें।
