Friday, February 13, 2026
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राज्य : जिन्हें अपनों का कांधा नसीब नहीं हो सका, उनके सगे बन गए किशन

-एक अप्रैल 2020 से 31 मई 2021 तक 70 कोविड मृतकों का कराया अंतिम संस्कार
उदयपुर, 01 जून (हि.स.)। राजस्थान के उदयपुर में एक सरकारी शिक्षक कोरोना के कष्टदायी काल में उन परिवारों के लिए परिवार का सदस्य बन गया है जो परिस्थितियों से मजबूर होकर अपनों का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए, यहां तक कि अंतिम दर्शन करना भी उनके लिए संभव नहीं हो सका। शिक्षक और उनके सेवाभावी मित्र न केवल कोविड से मरने वाले मरीजों का अंतिम संस्कार करते हैं बल्कि परिवार के लिए इसका सीधा प्रसारण करते हैं ताकि वे अंतिम दर्शन कर सकें। गत वर्ष 1 अप्रैल 2020 से शुरू किए इस पुनीत कार्य में 31 मई 2021 तक वे 70 दिवंगतों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं।

शिक्षक किशन सोनी सरकारी स्कूल में शारीरिक शिक्षक हैं। वे बताते हैं कि पिछले साल अप्रैल में निम्बाहेड़ा के एक कोविड मरीज की उदयपुर में मृत्यु हो गई थी। उनके परिवार के सदस्य भी संक्रमित थे और उनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं था। सोनी ने बताया कि मृतक उनके समाज से थे, वे समाज के पदाधिकारी भी हैं, ऐसे में अस्पताल से भी उनके पास फोन आया था। वे अंतर्द्वन्द्व की स्थिति में थे, क्योंकि कई गलतफहमियां थीं और उनका परिवार भी आशंकित था, लेकिन उन्होंने कोविड प्रोटोकॉल के साथ अंतिम संस्कार किया।

किशन सोनी के पास सोशल मीडिया के जरिए कॉल आते हैं। जब कोई उनसे संपर्क करता है, तो वह पहले यह सुनिश्चित करते हैं कि मृतक के परिवार से कोई अंतिम संस्कार करने के लिए वाकई नहीं है, और उसके बाद ही वह जिम्मेदारी लेते हैं। सोनी कहते हैं, पिछला डेढ़ महीना बहुत व्यस्त था। हमने जो अंतिम संस्कार किए हैं उनमें से आधे पिछले दिनों में थे और कभी-कभी हमें एक दिन में 3-4 शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ता था। इस स्थिति ने उन्हें भी झकझोर कर रख दिया।

सोनी ने बताया कि इस कार्य में वर्ष भर से हिन्दू जागरण मंच उदयपुर महानगर के कार्यकर्ता सतीश शर्मा, हेमन्त सोनी, देवेंद्र सिंह चूंडावत, रविकान्त त्रिपाठी, जयवीर सिंह चौहान एवं स्थानीय कर्मचारी नन्दू का सहयोग मिल रहा है। गत एक माह से नगर निगम उदयपुर से सफाई कर्मचारी वाल्मीकि समाज के युवा सेवाएं दे रहे हैं। अब नगर निगम से लकड़ियां भी निशुल्क मिलने लगी हैं जिससे उन्हें भी सहारा मिला है। अन्य साम्रगी जैसे घी, राल, कपूर, नारियल, चंदन आदि की व्यवस्था एक बार वे स्वयं कर देते हैं, फिर सम्बन्धित परिवार स्वेच्छा से यदि देना चाहता है तो ले लेते हैं, किसी से मांगते नहीं।

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