Monday, April 13, 2026
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राज्यपाल से राज्य सूचना आयुक्त की शिकायत, निलंबन की मांग

– आरटीआई एक्टिविस्ट बालकृष्ण अग्रवाल ने राज्यपाल सहित मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रशासनिक विभाग व मुख्य सूचना आयुक्त को भेजा पत्र

– राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती पर लगाया विभागीय हित में पक्षपात का आरोप

– शिकायतकर्ता ने मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण से मांगी थी डैम्पियर नगर के संबंध में जानकारी

– राज्य सूचना आयुक्त पर लगाया नियम विरुद्ध तरीके से अपील के निस्तारण का आरोप

लखनऊ/मथुरा (हि.स.)। राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती पर विभागीय हित में निर्णय सुनाते हुए सूचना नहीं दिलाने के साथ ही आमजन को सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना के अधिकारों से वंचित रखने का गंभीर आरोप मथुरा के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने लगाया है।

कृष्णानगर निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट बालकृष्ण अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रशासनिक सुधार विभाग सचिव उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्य सूचना आयुक्त व आयोग के सचिव व रजिस्ट्रार को एक शिकायती पत्र भेजा है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत कार्यवाही करते हुए राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती द्वारा निस्तारित किये गये आदेशों की उच्च स्तरीय जांच कराने और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के उच्चस्थ पद से निलंबित किये जाने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल को प्रेषित पत्र में मथुरा वृन्दावन प्राधिकरण पर भी भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप लगाये हैं।

शिकायतकर्ता बालकृष्ण अग्रवाल का आरोप है कि उसने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र डैम्पियर नगर के भू उपयोग व निर्मित व निर्माणाधीन व्यावसायिक निर्माणों आदि सहित पांच बिंदुओं पर दिसम्बर 2020 में मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त करने को आवेदन किया गया था। जिस पर मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण द्वारा कोई जानकारी नहीं देने पर वर्ष 2021 के फरवरी व जुलाई माह में विकास प्राधिकरण के सचिव को प्रथम अपील हेतु आवेदन किया। लेकिन मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के सचिव द्वारा प्रार्थी के आवेदन पर कोई भी संज्ञान नहीं लिया गया और न ही उक्त सम्बन्ध में कोई भी जानकारी उपलब्ध कराई गई। जिस पर प्रार्थी द्वारा सितम्बर 2021 में लखनऊ स्थित राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील हेतु आवेदन करते हुए वांछित सूचनाएं उपलब्ध कराए जाने की गुहार लगाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सूचना आयोग लखनऊ कार्यालय द्वारा प्रार्थी के द्वितीय अपील आवेदन में कोई न कोई कमी निकालते हुए वापसी भेजने के पश्चात राज्य सूचना आयोग द्वारा बताई गई कमियों को दूर करते हुए मई 2022 में पुनः आवेदन का प्रयास किया गया। जिस पर राज्य सूचना आयोग द्वारा प्रार्थी बालकृष्ण अग्रवाल के द्वितीय अपील को पंजीकृत करते हुए राज्य सूचना आयोग के कक्ष संख्या 6 में राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती के यहां 21 सितम्बर 2022 को सुनवाई की तिथि तय कर दी गई। उक्त तय तिथि को सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती के समक्ष मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के जनसूचना अधिकारी के प्रतिनिधि द्वारा प्रार्थी को एक अस्पष्ट व आधी-अधूरी भ्रामक सूचना उपलब्ध कराई गई। जिस पर प्रार्थी द्वारा आपत्ति व्यक्त करते हुए सही व स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराये जाने की मांग की गई, जिसको राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती द्वारा अनसुना करते हुए गलत व नियम विरुद्ध तरीके से निस्तारित कर दिया गया। इस दौरान प्रार्थी द्वारा उक्त वाद में अपनी आपत्ति दर्ज कराने का आग्रह किया गया, लेकिन प्रार्थी के आग्रह को अनसुना करते हुए राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती द्वारा विभागीय हित को देखते हुए निस्तारित कर दिया गया।

आरटीआई एक्टिविस्ट बालकृष्ण अग्रवाल ने सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण को दिसम्बर 2020 को आवेदित उक्त आवेदन को भ्रष्टाचार से जुड़े होने का दावा करते हुए राज्य सूचना आयोग, लखनऊ में सूचना का अधिकार नियमावली के नियम 12 के अंतर्गत पुनः सुनवाई हेतु अक्टूबर माह में आवेदन कर दिया। उक्त आवेदन की सुनवाई स्वयं मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा किये जाने की मांग किये जाने और शहर मथुरा के आवासीय क्षेत्र डैम्पियर नगर के सम्बंध में मांगी जानकारियां उपलब्ध कराए जाने को लेकर प्रार्थी द्वारा उच्च न्यायालय प्रयागराज में एक रिट याचिका दायर की गई।जिस पर उच्च न्यायालय द्वारा 6 दिसम्बर को सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त को नियमानुसार उक्त मामले में आगामी दो माह में सुनवाई करने के साथ ही प्रार्थी द्वारा वांछित सूचनाओं को उपलब्ध कराने का आदेश पारित किया गया है।

आरटीआई एक्टिविस्ट बालकृष्ण अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को भेजे एक शिकायती पत्र में राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती पर विभागीय हित में आदेश पारित करने के साथ सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और सूचना का अधिकार अधिनियम में उल्लिखित दिशा निर्देशों के उल्लंघन करने और गलत व नियम विरुद्ध तरीके से वादों का निस्तारण किये जाने के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग की है।

सियाराम

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