बलिया(हि. स.)। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने यहां से ”जल भरो आंदोलन” का शुभारंभ मटके में जल भरकर किया गया। वे सोमवार को जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता करने पहुंची थीं।
जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, समारोह के मुख्य अतिथि इसरो के मानद प्रोफेसर पद्मश्री वाईएस राजन व कुलपति कल्पलता पाण्डेय ने एक बड़े मटके में जलभरकर जल संरक्षण के प्रति जागरूक होने का संदेश दिया। उन्होंने अपने सम्बोधन में गंगा नदी के प्रदूषण की ओर भी ध्यानार्षित किया और इस दिशा में केन्द्र सरकार द्वारा ‘नमामि गंगे परियोजना” के माध्यम से किए गए प्रयासों का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत की इस पहल को दुनिया भर में सराहना मिल रही है और इसे दुनिया की शीर्ष दस पहलों में शामिल किया गया है।
राज्यपाल जिस विश्वविद्यालय में इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत कर रही थीं, वह विश्व प्रसिद्ध सुरहा ताल के किनारे स्थित है। जो जल संरक्षण की मिसाल है। राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण व जल संरक्षण पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा जितना जल वर्ष भर में उपयोग में लाया जाता है, वह उतने जल के संरक्षण हेतु प्रभावी प्रयास करें।
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