लखनऊ (हि.स.)। राष्ट्रीय लोकदल ने नौकरशाहों के राजनीति में प्रवेश करने पर पांच साल तक प्रतिबंध लगाये जाने की मांग की है। टीम -आर एल डी के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम मिश्रा ने हाल ही में आई.पी.एस.की नौकरी छोड़कर कानपुर के कमिश्नर द्वारा भा.ज.पा.की सदस्यता लेने को भविष्य के लिए गंभीर संवैधानिक संकट बताया है।
उन्होंने कहा कि यह तो एक कमिश्नर है, जिसने इस्तीफ़ा दे दिया तो पता चल गया। अभी ना जाने कितने ऐसे अधिकारी होंगे, जो सरकारी सेवा में रहते हुए सत्तारूढ़ दल के एजेंट की तरह कार्य कर रहे होंगे।
मिश्र ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा व न्यायिक सेवा जैसी अति महत्वपूर्ण व उत्कृष्ट सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों के लिए राजनीति में प्रवेश करने पर तत्काल कठोर व आवश्यक नियम बनाए जाने की मांग की है। रालोद नेता ने कहा कि यदि इसी प्रकार सेवाएं छोड़कर प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक दलों की सदस्यता लेने लगेंगे, तो इस देश की पूरी प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था पर न केवल प्रश्नचिह्न लग जाएगा बल्कि ‘लॉयड जॉर्ज’ का “शासन का फौलादी ढांचा “भी ढह जाएगा ।
अनुपम मिश्रा ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयोग को ऐसी नियमावली बनानी चाहिए, ताकि कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा,भारतीय पुलिस सेवा अथवा न्यायिक सेवा का अधिकारी सेवानिवृत्ति अथवा वी.आर.एस. लेने के उपरांत न्यूनतम पांच वर्षों तक सक्रिय राजनीतिक में प्रवेश नहीं कर पाए। तभी हम भारत के संघीय ढांचे को बरकरार रख पाएंगे। क्योंकि यदि प्रशासक नौकरी छोड़कर सत्तारूढ़ दल की सदस्यता लेते हैं तो इनके द्वारा पिछले प्रशासनिक निर्णयों व कार्यों की निष्पक्षता पर न केवल उंगली उठेगी, बल्कि उसके दूरगामी भयानक परिणाम सामने आएंगे।
बृजनन्दन
