Saturday, April 4, 2026
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राजद्रोह कानून को खत्म कर सकता है सुप्रीम कोर्ट?

वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला

नेशनल डेस्क

नई दिल्ली। भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए (राजद्रोह) की वैधता को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने के निर्देश देने की मांग संबंधी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई जारी रखेगा। सुप्रीम कोर्ट पहले मामलों को पांच या सात जजों की बड़ी बेंच को रेफर करने के मुद्दे पर मंगलवार को सुनवाई करेगा। इस संबंध में शीर्ष अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र को शनिवार तक का समय दिया है। इससे पहले केंद्र सरकार ने एक सप्ताह का समय मांगा था। अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की उच्चतम न्यायालय से बुधवार को गुहार लगाई थी। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की विशेष पीठ ने 27 अप्रैल को सुनवाई करते हुए सरकार को 30 अप्रैल तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।

पीठ ने साथ ही इस मामले के निपटारे के लिए सुनवाई की तारीख 5 मई मुकर्रर करते हुए स्पष्ट तौर पर कहा था कि एक साल से लंबित इस मामले में स्थगन आदेश की कोई अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी। शीर्ष अदालत ने गुरुवार को भी यही बात दोहराई। सरकार ने रविवार को एक नया आवेदन पत्र दायर कर कहा था कि जवाब तैयार है, लेकिन संबंधित अथॉरिटी से स्वीकृति मिलनी अभी बाकी है। मैसूर स्थित मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एस जी वोम्बटकेरे, एडिटर्स गल्डि ऑफ इंडिया एवं अन्य की ओर से राजद्रोह कानून के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सर्वोच्च अदालत ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए (15 जुलाई 2021 को) राजद्रोह कानून के प्रावधान के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त व्यक्त करने के साथ ही सवाल करते हुए कहा था कि स्वतंत्रता के लगभग 75 वर्षों के बाद भी इस कानून की क्या आवश्यकता है? सर्वोच्च अदालत ने विशेष तौर पर ’’केदार नाथ सिंह’ मामले (1962) में स्पष्ट किया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए के तहत केवल वे कार्य राजद्रोह की श्रेणी में आते है, जिनमें हिंसा या हिंसा को उकसाने के तत्व शामिल हों। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिकाओं में कहा गया है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए संविधान के अनुच्छेद 19(1) (ए) के तहत प्राप्त अभव्यिक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार उल्लंघन करती है।

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