होली परमानंद की अनुभूति है, ये एक रस तत्व, जो सभी में विद्यमान: गुरु शरणानंद महाराज
मथुरा (हि.स.)। भगवान श्रीकृष्ण की रमणीक कहे जाने बाली महावन (रमणरेती) स्थित कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज के आश्रम में बुधवार वार्षिक होली महोत्सव का आयोजन हुआ। कार्ष्णि गुरु शरणानंद ने राधा कृष्ण के स्वरूपों के साथ फूलों की होली खेली और भक्तों पर प्रसादी स्वरूप लड्डू लुटाएं।
कार्ष्णि गुरु शरणानन्द महाराज ने कहा कि होली में परमानन्द की अनुभूति है एक रस तत्व है। वेद में ब्रह्म को रस कहा गया है। परम तत्व को रस कहा है। यह रसतत्व सभी में विद्यमान है।
बुधवार रमणरेती में गुरु शरणानन्द महाराज के सानिध्य में भगवान रमणबिहारी का विशेष पूजन किया गया। उन्हें पुष्प और रंग अर्पित किया गया। इसके पश्चात रासलीला का मंचन ब्रज के कलाकारों द्वारा हुआ। भगवान कृष्ण की लीलाओं के मंचन के मध्य फूलों की होली खेली गई। भगवान राधाकृष्ण के स्वरुपों के साथ कार्ष्णि गुरु शरणानन्द महाराज ने भी फूलों की होली का आनन्द लिया। इसके पश्चात ब्रज के होली के रसिया गायन के बीच भक्तों पर जमकर फूल बरसाए गए।
इस बीच कार्ष्णि गुरु शरणानन्द ने भक्तों को प्रसादी लड्डू भी लुटाए। लड्डूओं को प्राप्त करने के लिए भक्तों में होड़ सी मच गई। वहीं महिला भक्त, युवा और बच्चे होली के रसियाओं पर जमकर नाचे और होली का भरपूर आनन्द लिया।
मयूर नृत्य देख राधाकृष्ण के जयकारों से गूंजा वातावरण रमनरेती महावन में आज आयोजित होली महोत्सव की सुरुआत परम संत कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज के द्वारा भगवान राधा कृष्ण के पूजन और आरती के साथ हुआ। इसके बाद जहां रासमण्डल के कलाकारों द्वारा बड़े ही सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये तथा फिर राधाकृष्ण के स्वरूपों के द्वारा बड़ा ही मनोहारी मयूर नृत्य देख उत्सव में आये हजारों भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। सभी ने जोरदारी के साथ राधा कृष्ण की जय-जयकार के नारे लगाए।
रमणरेती आश्रम: गुरु शरणानंद ने खेली राधा-कृष्ण के साथ फूलों की होली
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