-केंद्रीय सहायता की बढ़ी राशि से सरकार ने बदली यूपी की तस्वीर
-आरोप, केंद्रीय योजनाओं का लाभ उठाने के बजाय सियासी नौटंकी करती रहीं पिछली सरकारें
लखनऊ(हि.स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का दावा है कि पिछली सरकारों ने जहां रास्ते बंद किए थे, योगी सरकार ने वहां से आगे बढ़ने की शुरुआत की। जिन केंद्रीय कार्यक्रमों और योजनाओं को पिछली सरकारों ने दरकिनार कर दिया था उन्हीं के दम पर योगी सरकार ने साढ़े चार साल में यूपी की तस्वीर बदल डाली। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने यूपी में विकास की रफ्तार को दोगुना कर दिया ।
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यहां कहा कि प्रदेश में पहली बार विकास योजनाओं की किरण जन जन तक पहुंच रही है। केंद्र की पिछली सरकारों के मुकाबले मोदी सरकार ने यूपी को दोगुनी सहायता राशि दी, जबकि लंबे समय तक केंद्र की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने उप्र के विकास को हाशिये पर रखा।
उन्होंने कहा कि राज्य की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी की अगुआई वाली सरकार ने केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाली सहायता और केन्द्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया। केंद्रीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन और समीक्षा की कमान भी खुद मुख्यमंत्री ने संभाली। प्रदेश में यह पहली बार हुआ।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में कांग्रेस की अगुआई वाली सरकार ने यूपी के विकास के लिए महज 17 हजार करोड़ की सहायता राशि दी थी। इस दौरान राज्य में सपा सरकार थी। केंद्र की सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में यूपी के विकास के लिए 32 हजार करोड़ रुपये की सहायता राशि जारी की, लेकिन उस समय की सपा सरकार इस बड़ी धनराशि का इस्तेमाल विकास को गति देने में नहीं कर सकी।
उन्होंने बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को 2017-18 से 31 अगस्त 2021 तक कुल 201584 करोड़ रुपये केंद्रीय अनुदान राशि दी है। जबकि इसकी तुलना में 2012-13 से 2016-17 तक पिछली सरकार के दौरान कुल 136832.63 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के तौर पर यूपी को मिले। दरअसल, कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए केंद्र सरकार ने 2012-13 में 17337.78 करोड़ रुपये और 2013-14 में करीब 22405.16 करोड़ केंद्रीय सहायता के रूप में यूपी को जारी किए। केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद 2014-15 में 32691.47 करोड़ रुपये, 2015-16 में 31861.33 करोड़ रुपये और 2016-17 में 32536.86 रुपये यूपी को केंद्रीय अनुदान के रूप में मिले।
प्रवक्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश में विकास ने रफ्तार तभी पकड़ी जब केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार ने एक साथ मिल कर काम करना शुरू किया। राज्य सरकार को केंद्र सरकार के समर्थन के साथ भरपूर लाभांश भी मिला । केंद्र ने विकास के लिए 2017-18 में 40648.44 करोड़ रुपये, 2018-19 में 42988.48 करोड़ रुपये, 44043.96 करोड़ रुपये, 2020-21 में 57487.59 करोड़ रुपये और 2021-22 में 31 अगस्त तक 16415.61 करोड़ रुपये की धनराशि यूपी में भेजी।
