Saturday, February 14, 2026
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योगी के चार साल : कानपुर के कुख्यात विकास दुबे सहित 135 अपराधी ढेर

 13 पुलिसकर्मी भी उत्तर प्रदेश में हुए शहीद, कानपुर का बिकरु कांड रहा चर्चित
दीपक वरुण

लखनऊ (हि.स.)। पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्ताधारी पार्टी सपा को करारी शिकस्त देकर धमाकेदार जीत दर्ज की थी। सत्ता में भाजपा के आने के बाद मुख्यमंत्री को लेकर कई दिनों तक लखनऊ से लेकर दिल्ली तक मंथन का दौर चला और अंतत: चार साल पहले आज से दो दिन बाद फायरब्रांड हिन्दू नेता गोरखपुर के तत्कालीन सांसद आदित्यनाथ योगी के सिर पर यूपी का ताज पहनाया गया। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने अपराधियों को पहला संदेश दिया कि या तो अपराध छोड़ दें या यूपी। 
इन चार सालों में योगी आदित्यनाथ ने अपनी नीति में कहीं भी समझौता नहीं किया और अपराधी या तो पुलिस मुठभेड़ में मारे गये या खुद अपने को सुरक्षित करने के लिए सलाखों के पीछे पहुंच गये। इन चार सालों में देखा जाये तो 135 अपराधी पुलिस की गोली का शिकार हुए।
इनमें सबसे अधिक कानपुर की संख्या रही, जिसमें ​कुख्यात अपराधी विकास दुबे सहित छह अपराधी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुए। हालांकि यह घटना देश की सबसे अधिक चर्चित रही, क्योंकि अपराधियों को मारने से पहले पुलिस विभाग ने अपना एक सीओ, एक थानाध्यक्ष, एक उप निरीक्षक और पांच पुलिसकर्मियों को गंवा चुके थे। कुछ भी हो इन चार सालों में देखा जाये तो पहली बार उत्तर प्रदेश में अपराधियों को लेकर सरकार के हाथों पर कंपन नहीं दिखा। 
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यह दावा किया है कि योगी सरकार के इन चार वर्षों में प्रदेश की कानून व्यवस्था में बेहतर सुधार हुआ है। इनामी, वांछित और वारंटियों के खिलाफ बराबर अभियान चलता रहा और आगे भी चलता रहेगा। अभियान के तहत अब तक 135 अपराधी मारे जा चुके हैं। इसी डर की वजह से अब अपराधी प्रदेश छोड़कर दूसरे राज्यों में शरण ले रहे हैं। या फिर अपनी जमानतें रद्द करवाकर जेल में ही रहना पसंद कर रहे हैं। 
एनकाउंटर में मारे गए 135 अपराधी, 13 पुलिस शहीद 
पुलिस विभाग के ​मुताबिक वर्ष 2017 में एनकाउंटर में 28 अपराधी मारे गए थे। वर्ष 2018 में यह संख्या बढ़कर 41 हो गयी। इसके बाद वर्ष 2019 में 34 अपराधी और वर्ष 2020 में 26 और वर्ष 2021 की शुरुआत होते ही अब तक छह अपराधी मारे चुके हैं। वहीं, 13 पुलिस कर्मी भी शहीद हुए है। 
महाकाल की शरण में भी नहीं बच पाया विकास
अक्सर देखा जाता है कि जो भी व्यक्ति जरायम की दुनिया में बादशाहत हासिल करता है, उसका धार्मिक लगाव जबरदस्त होता है। अपने बचाव के लिए आस्था में अधिक जोर देता है। चाहे वह बुन्देलखण्ड के पाठा क्षेत्र में बादशाहत हासिल करने वाला कुख्यात शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ रहा हो, या चंबल की रानी फूलन देवी। इसी कड़ी में एक और नाम रहा कानपुर का गैंगस्टर विकास दुबे, जो थाना परिसर में भी राज्य मंत्री को गोलियों से भूनकर कानपुर परिक्षेत्र में अपना दबदबा कायम किया था।
विकास दुबे के विषय में कहा जाता है कि जब भी वह अपराध करता था तो उज्जैन के महाकाल दर्शन करने जाता था। यही नहीं जब अपने गांव में पिछले वर्ष 02 जुलाई की रात्रि अपने साथियों संग सीओ देवेन्द्र मिश्रा, शिवराजपुर थानाध्यक्ष महेश चन्द्र यादव समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की तो बचने के लिए उसने महाकाल की शरण ली, लेकिन योगी के तेवर के सामने उसकी आस्था बेकार चली गयी और यूपी एसटीएफ पकड़कर कानपुर ले आयी। कानपुर लाते समय ही पुलिस मुठभेड़ में विकास दुबे का खात्मा हो गया। 

पहलवान से लेकर मोती तक का सफर

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में पहला अपराधी 27 सितम्बर, 2017 को मारा गया था, जिसका नाम मंसूर पहलवान जो सहारनपुर का रहने वाला था। मंसूर पर 50 हजार रुपये का इनाम था। इसके बाद प्रमुख एनकाउंटरों में आजमगढ़ का तीन लाख का इनामी सूर्यांश दुबे, 50 हजार का इनामी रईस बनारसी, ढाई लाख का इनामी शकील आदि रहे। इस सरकार में अब तक अंतिम पुलिस मुठभेड़ में मारा गया कासगंज का एक लाख रुपये का इनाम मोती है।

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