-योग के प्रशिक्षण से जीवन कौशल का विकास होता है : प्रो. केएन सिंह
-मुविवि में राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों का योग प्रशिक्षण का समापन
प्रयागराज (हि.स.)। सतत् अभ्यास योग का पहला सूत्र है। सफलता और असफलता में समान भाव से रहना ही योग है। तात्कालिक असफलता बड़ी सफलता के द्वार खोलती है। जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज आनंद की प्राप्ति है, जो योग से मिलती है। योगाभ्यास से जीवन की गुणवत्ता परिलक्षित होती है।
यह बातें अपर प्रमुख सचिव, उप्र शासन अनिल कुमार ने उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि में उच्च शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश तथा उप्र शासन द्वारा प्रायोजित प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों के शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों के एक सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर सम्बोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता से अधिक चीजों का संग्रह नहीं करना चाहिए। इसके लिए जीवन में अपरिग्रह सुखी जीवन का एक मूल मंत्र है। सफल जीवन से ज्यादा संतुष्ट जीवन महत्वपूर्ण है। योग जीवन में आनंद की प्राप्ति कराता है। योग हमें राग द्वेष ईर्ष्या वैमनस्य से परे होकर जीना सिखाता है। हमें भूतकाल की पीड़ा और भविष्य की चिंता के फेर में नहीं पड़ना चाहिए तभी हम वर्तमान में जी सकते हैं।
उच्च शिक्षा निदेशालय, उप्र की संयुक्त निदेशक डॉ सुनंदा चतुर्वेदी ने कहा कि एनईपी 2020 में योग एवं ध्यान को महत्वपूर्ण अंग के रूप में पाठ्यक्रम में स्थान दिया गया है। प्रदेश सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों के शारीरिक शिक्षकों को योग प्रशिक्षण का मौका दिया है। भावी पीढ़ी का उत्तरदायित्व शारीरिक शिक्षकों को सौंपा है। योग के माध्यम से ही छात्रों को अवसाद ग्रस्त होने से बचाया जा सकता है। योग तन और मन को संतुलित रखता है। ध्यान और आसन से जीवन तनाव मुक्त हो सकता है।
अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम निदेशक प्रो. गिरिजा शंकर शुक्ल ने किया एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की रिपोर्ट आयोजन सचिव अमित कुमार सिंह ने प्रस्तुत की। संचालन डॉ. मीरा पाल एवं धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव विनय कुमार ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि अनिल कुमार ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पूर्वी उत्तर प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों के 42 शारीरिक शिक्षा प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
विद्या कान्त
