Monday, April 6, 2026
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यूपी विस चुनाव : कई मिथकों को तोड़ने की ओर आगे बढ़ते दिख रही भाजपा

2017 में कोई नहीं लगा सका था अनुमान कि भाजपा को वोट बैंक 15 से हो जाएगा 39.67 प्रतिशत

-प्रियंका के आने के बावजूद कांग्रेस का आधे से अधिक घट गया मत प्रतिशत व सीटें

लखनऊ (हि.स.)। पहले एक मिथक था, “जो सीएम गौतमबुद्धनगर में जाता था, उसकी कुर्सी चली जाती थी। इस कारण कोई मुख्यमंत्री वहां नहीं जाता था। उस मिथक व डर को योगी आदित्यनाथ ने तोड़ा और वे हमेशा गौतमबुद्धनगर जाते रहते हैं। वैसे ही 1985 के बाद किसी को दूसरा कार्यकाल नहीं मिला। ये सारे मिथक भाजपा तोड़ पाएगी, इसका उत्तर भविष्य के गर्त में है। इतना जरूर है कि भाजपा ने ही पंजाब में पुन: सरकार न बनने के मिथक को तोड़ा था और ऐसे आसार दिख रहे हैं कि यहां भी उस मिथक को तोड़ देगी।

यदि 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा के मतों को देखें तो यह कोई नहीं कह सकता कि मिथकों को तोड़ने में इसे कठिनाई हो सकती है। जो पार्टी 2012 में मात्र 15 प्रतिशत वोट बैंक के साथ 47 सीटें पायी थी, वह 2017 में 39.7 प्रतिशत मत पाकर 325 सीटें प्रदेश में हथिया लीं। उस समय भी कोई इस अनुमान में नहीं था कि भाजपा को इतनी सीटें भी मिल सकती हैं, क्योंकि राममंदिर आंदोलन जैसा माहौल भी कहीं नहीं दिख रहा था। इसके बावजूद सपा और बसपा से ऊब चुकी जनता ने भाजपा को सिर माथे पर बैठाया।

अभूतपूर्व वृद्धि की थी भाजपा ने

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा व सहयोगी दलों को मिलाकर 325 सीटें मिली थीं। उसमें सिर्फ भाजपा 312 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा को मत प्रतिशत 39.67 था। वहीं सहयोगी दलों को मिलाकर 41.35 प्रतिशत रहा। वहीं समाजवादी पार्टी 224 सीटों से नीचे गिरकर 47 सीटों पर आ गयी। उसके मत प्रतिशत में 7.35 प्रतिशत कम होकर 21.8 प्रतिशत पर आ गया। वहीं बसपा का वोट बैंक मात्र 3.71 प्रतिशत वोट कम हुआ। उसका वोट प्रतिशत 22.2 रहा। भाजपा, सपा व बसपा के कुल पाये मत को देखें तो क्रमश: 34,403,039, 18923689 व 19281352 मत थे।

प्रियंका के बावजूद कांग्रेस घटती ही गयी यूपी में

वहीं 2017 में प्रियंका वाड्रा का यूपी चुनाव में सक्रिय होने के बावजूद कांग्रेस का 2012 के 28 सीटों व 11.67 प्रतिशत मत की अपेक्षा 2017 में सपा से गठबंधन के बावजूद मात्र सात सीटों व 6.25 प्रतिशत पर आकर लटक गयी। कांग्रेस की यूपी में यह सबसे कम सीटें रहीं। यह एक चौंकाने वाला ही वोट प्रतिशत था। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।

अब तक का रूख भाजपा के पक्ष में

राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि अब तक के जनता के रूख को देखकर यही कहा जा सकता है कि भाजपा इस बार भी उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने जा रही है। राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन वर्तमान आधार किसी दूसरी पार्टी की सरकार बनते नहीं दिख रहा है। पिछले चुनाव में तो कोई चुनावी पंडित भाजपा का पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बना रहा था लेकिन परिणाम देखकर सभी चौंक गये। इस बार तो सभी का अब तक का अनुमान भाजपा के पक्ष में ही सकारात्मक रूख दिख रहा है।

बसपा को बहुत कम आंकना है बेमानी

यदि बसपा के वोट प्रतिशत पर नजर दौड़ाएं तो बसपा ने 2017 में बसपा का वोट बैंक मात्र 3.71 प्रतिशत वोट कम हुआ। उसका वोट प्रतिशत 22.2 रहा। कुल वोट 19281352 थे। वहीं 2012 में बसपा को 80 सीटें ही मिलीं लेकिन उसका वोट प्रतिशत 25.91 प्रतिशत था। वहीं 2007 में सर्वाधिक चरमोत्कर्ष पर रही बसपा को 206 सीटें मिली थीं। उस समय 30.43 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। 2002 की अपेक्षा बसपा के मत प्रतिशत में 7.37 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई थी। यह वहीं समय था, जब बसपा ने ब्राह्मण-दलित गठजोड़ का कार्ड खेला था। 2002 में बसपा ने 23.06 प्रतिशत वोट व 98 सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे देखा जाए तो 22 प्रतिशत से कम बसपा का वोट बैंक कभी कम नहीं हुआ। ऐसे में राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बसपा के बारे में जितना कम का अनुमान लगाया जा रहा है। वैसा है नहीं। उसके भी लड़ाई में बने रहने का अनुमान है, जबकि बसपा के होने वाले वोट बैंक की कमी को भाजपा अपनी तरफ खिंच सकती है।

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