Sunday, April 12, 2026
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यूपी : वन विभाग में पशु चिकित्सकों का कैडर बनाने की तैयारी

गोरखपुर (हि.स.)। वन्यजीव की दृष्टि से समृद्ध भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दूसरे कार्यकाल में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में पशु चिकित्सकों का कैडर तैयार करने को लेकर काफी गम्भीर हैं। माना जा रहा है कि बुधवार से लोकभवन में होने वाले विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा और भविष्य की तैयार की जाने वाली योजनाओं में वन विभाग में भी पशु चिकित्सकों के कैडर बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बता दें कि महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश वन विभाग में पशु चिकित्सकों का कैंडर बना लिया गया है।

भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश वन्यजीव की दृष्टि से समृद्धशाली है। लेकिन दूसरी ओर यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी लगातार बढ़ रहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रथम कार्यकाल में मानव वन्यजीव संघर्ष को आपदा घोषित करने वाला देश का पहला राज्य यूपी बना। इको टूरिज्म की समृद्धि के लिए भी कई विकासपरक परियोजनाएं भी आई। इतना ही नहीं, शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणी उद्यान गोरखपुर की स्थापना भी प्रदेश के तीसरे प्राणी उद्यान के रूप में हुई। अब अपने दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी वन विभाग में पशु चिकित्सकों का बकायदा कैडर बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

तैयार किए जा रहे प्रस्ताव में वन विभाग की कुछ ऐसी नियुक्तियां रद्द भी की जाने की व्यवस्था है। माना जा रहा है कि रद्द की जाने वाली नियुक्तियों की अब कोई आवश्यकता नहीं है। बताया जा रहा है कि इन्हें रद्द कर 19 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति का प्रावधान करने की तैयारी है।

प्रतिनियुक्ति पर सिर्फ एक पशु चिकित्सक

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 3 प्राणी उद्यान, 3 टाइगर रिजर्ब, दुधवा नेशनल पार्क, इटावा लायन सफारी, कई मिनी जू, वन्यजीव विहार, पक्षी विहार और इको टूरिज्म सर्किट हैं। बावजूद इसके वर्तमान में वन विभाग में पशुपालन विभाग से सिर्फ एक पशु चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर हैं। शहीद अशफाक उल्ला खॉ प्राणी उद्यान गोरखपुर में नियुक्त इकलौते पशु चिकित्सक डॉ योगेश प्रताप सिंह का प्रतिनियुक्ति की अवधि भी खत्म होने वाली है। कुछ पशु चिकित्सकों की संविदा आधार पर नियुक्ति प्राणी उद्यान में की गई है, लेकिन पशुपालन विभाग में संविदा नियुक्ति मिलते ही इन चिकित्सकों की प्राथमिकता वही रहती है।

जरूरी है नियमित कैडर

हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिका डॉ अनिता अग्रवाल कहती हैं कि वन विभाग से 3 या 5 वर्ष की प्रतिनियुक्ति पर पशु चिकित्सक आते हैं। उन्हें वाइल्ड लाइफ का कोई अनुभव नहीं होता। इस अवधि में वे प्रशिक्षण और अपने अनुभव से सीखते हैं कि वापस उन्हें मूल विभाग जाना पड़ता है। ऐसे में फिर नया पशु चिकित्सक आता है जो वाइल्ड लाइफ से व्यवहारिक रूप से अनभिज्ञ होता है। दूसरे सभी चिकित्सक मन भी नहीं लगा पाते क्योंकि उन्हें तीन साल बाद मूल विभाग में वापस जाने का पहले से ही संज्ञान होता है।

आमोद

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