Monday, April 13, 2026
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यूपी में प्रियंका के समय भी कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे पार्टी के पुराने नेता

-तवज्जो न मिलने से पार्टी छोड़ रहे पुराने कांग्रेसी

बृजनन्दन राजू

लखनऊ (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में लम्बे समय से सत्ता से दूर रही कांग्रेस के पुराने नेता भी पार्टी में इन दिनों उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेता अपना दर्द पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अलावा सोशल मीडिया पर भी बयां कर चुके हैं। प्रदेश के कई कांग्रेस नेता पार्टी का दामन छोड़कर अन्य दलों में जा चुके हैं। कांग्रेस की यह स्थिति तब है जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार पूरे शबाब पर है और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी प्रदेश की प्रभारी हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सात में से चार विधायक पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। वहीं पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और ललितेश पति त्रिपाठी जैसे कद्दावर नेता पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इससे पहले उन्नाव की पूर्व सांसद अन्नू टंडन भी कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो चुकी हैं। नेताओं के कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में कांग्रेस मजबूत कम टूट ज्यादा रही है।

प्रियंका गांधी की प्रदेश में सक्रियता से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में उत्साह तो जरूर आया है, लेकिन उसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं पड़ रहा है। यही कारण है कि ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूं’ अभियान को सफलता नहीं मिल सकी। कांग्रेस एक तरफ लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान के जरिए महिलाओं को आगे लाना चाहती है। वहीं पार्टी के प्रदेश कार्यालय एवं मीडिया विभाग में महिलाओं को समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव दिल्ली की टीम के भरोसे लड़ना चाहती है। चुनाव संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय दिल्ली से लिए जा रहे हैं। यहां तक कि चुनावी अभियान का संचालन भी दिल्ली में बैठे नेता कर रहे हैं।

ऐसा भी नहीं है कि प्रदेश में कांग्रेस के पास नेताओं का अभाव है। कांग्रेस के पास अभी भी प्रमोद तिवारी, डॉ.निर्मल खत्री, सलमान खुर्शीद, पीएल पुनिया, प्रदीप जैन आदित्य और राजेश मिश्रा सरीखे दर्जनों नेता हैं, जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में खासा प्रभाव है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर यूपी के चुनावी परिदृश्य से अचानक गायब हो गये हैं। प्रियंका गांधी का ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ नारा भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है कि उनकी कोई जरूरत नहीं है। प्रियंका गांधी अकेले ही निर्णय भी ले सकती है।

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता सिद्धार्थ प्रिय श्रीवास्तव ने पार्टी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि चिंता नहीं चिंतन की जरूरत है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में। 1989 के बाद बड़ी संख्या में हाईकमान के विश्वास पात्र कांग्रेस छोड़ रहे हैं। अभी समय है कि अपने पुराने साथियों पर विश्वास कर चुनाव मैदान में उतारें।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अशोक सिंह ने हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि जो लोग कांग्रेस छोड़ रहे हैं वह अपने व्यक्तिगत हित साधने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। कांग्रेस विचारधारा आधारित पार्टी है जो विचारधारा के लिए संघर्ष करता है उसे इतिहास याद करता है। रही बात उत्तर प्रदेश से जुड़े कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तो उत्तर प्रदेश के चुनाव संबंधित निर्णय और संचालन में उनकी अहम भूमिका है। पार्टी ने सबको जिम्मेदारी भी दी है और सभी नेता लगे भी हैं।

बृजनन्दन/पवन

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