Wednesday, April 1, 2026
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यूपीसीए : निदेशक बनने के लिए हर कोई भिड़ा रहा हैं जुगाड़

तीन दशक से यूपीसीए में कायम है सिंहानिया परिवार का दबदबा

कानपुर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) में बीते कई महीनों में दो निदेशकों अकस्मात मौत से रिक्त हुए दो पदों के लिए वर्तमान पदाधिकारी अपनों की नियुक्ति करवाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहें हैं। कई पदाधिकारी अपने लोगों को अब बैठकों व अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान वहां पर भेजने भी लगे हैं। यही नहीं इस बार संघ में सचिव पद के लिए चुनाव भी किया जाना है।

संघ की वार्षिक आम सभा का एलान अभी तक नही किया जा सका हे। सचिव पद के चुनाव को लेकर संघ के पदाधिकारियों के बीच अन्दरूनी कलह भी सामने आ रही है लेकिन पदाधिकारी उसमें समय-समय पर पर्दा डालने का काम भी करते आ रहे है। यूपीसीए के सचिव पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए गहमा गहमी भी तेज हो चली है। हालांकि पद का समय समाप्त होने के बाद युद्धवीर सिंह के स्थान पर संयुक्त सचिव फहीम अहमद ने सचिव का पद संभाल लिया है।

बीते साल यूपीसीए अध्यक्ष यदुपति सिंघानिया के निधन के बाद संघ के निदेशक इन्चार्ज एसके अग्रवाल व इकाना स्टेडियम के नोडल अफसर प्रेमधर पाठक के निधन के बाद अब संघ में नगर से बाहर के पदाधिकारियों को संघ में बडा पद पाने के होड़ सी मची है। यूपीसीए ने पिछले दिनों यदुपति जी की मां सुशीला देवी सिंघानिया को संघ का संरक्षक घोषित कर दिया है। उनके संरक्षक बनने के बाद ये तय हो गया है कि सिंहानिया परिवार से सचिव पद के लिए कोई भी शख्स आगे नही आएगा।

सिंघानिया परिवार का यूपीसीए में हमेशा से ही दबदबा कायम रहा है। हालांकि उन्होंने ज्यादा दखल कभी नहीं दिया लेकिन एक समय जब मामला बिगड़ा तो डा. गौरहरि सिंघानिया ने यूपीसीए के अध्यक्ष पर की कमान संभाली। लेकिन सूत्रों की माने तो इस बार सचिव सिंहानिया परिवार से तो नही रहेगा लेकिन संघ पर उनके परिवार का वर्चस्व रहेगा ये समय पर निर्भर रहेगा।

तीन दशक से यूपीसीए में सिंहानिया परिवार को है दबदबा

बीते तीन दशक पूर्व यूपीसीए में कई बार उतार-चढ़ाव आए और विवादों का साया रहा तब सिंहानिया परिवार ने इसकी बागडोर सम्भाली और संघ को नई ऊचांइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उनके लम्बे कार्यकाल के बाद यह जिम्मेदारी उनके पुत्र यदुपति सिंघानिया को सौंपी गयी। सचिव पद पर सभी की नजरें इसलिये भी टिक गयी हैं क्योंकि पिछले दिनों संघ के बोर्ड आफ डायेरक्टर की बैठक में सुशीला देवी सिंघानिया को संरक्षक बना दिया गया था। उनके संरक्षक बनने के बाद से कयास लगने लगे हैं कि इस बार सिंघानिया परिवार का सदस्य शायद ही इसमें दिलचस्पी ले।

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