Friday, April 3, 2026
Homeविचारयदि ममता कहीं पीएम बन गयीं तो?

यदि ममता कहीं पीएम बन गयीं तो?

के विक्रम राव

गोमुख से निकलते वक्त गंगा निर्मल तथा अविरल रहती हैं। काशी में तनिक मटमैली। मगर हुगली (हावड़ा) आने तक एकदम गंदली हो जाती है। आज वहीं की निवासिनी ममता बनर्जी जो कभी भागीरथी जैसी थीं, अब हुगली जैसी हो गयीं हैं। मलिन, गर्हित राजनीति की मानिन्द। भ्रष्ट तथा मौकापरस्त। इसीलिये उनकी प्रधानमंत्री बनने वाली आकांक्षा भी विकृत हो गयी है। उनके शत्रु नरेन्द्र मोदी की हसरत है कि भारत कांग्रेस मुक्त हो जाये। प्रधानमंत्री से सात साल छोटी ममता की कामना है कि सोनिया मुक्त कांग्रेस का नजारा दिखे। दोनों दावा करते हैं कि दूसरे से खुद उनके परिधान ज्यादा बेदाग हैं, सफेद हैं। मगर फर्क गंभीर है। मोदी मानते है कि परिवार से सटोगे तो देश से हटोगे। ठीक विपरीत हैं ब्रह्मचारिणी ममता। वे अपने सगे भतीजे अभिजीत बनर्जी को बढ़ा रहीं हैं। वामपंथी लोकसभाई सीट रही डायमंड हार्बर (2004) एक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट के कब्जे में रही थी। अब बुआ ने भतीजे को दिलवा दी। वे उसे क्रमशः प्रोन्नत कर रहीं हैं। तृणमूल कांग्रेस की इस आजीवन अध्यक्षा ने भतीजे को राष्ट्रीय महासचिव नामित किया है। वे सांसद भी हैं। ’एक व्यक्ति एक पद’ का सिद्धांत बनाया था टीएमसी ने। अपवाद केवल बुआ और भतीजा हैं। बस सियासी उत्तराधिकारी घोषित होने का इंतजार है। हालांकि सोनिया की दोनों संतानों का पार्टी पदारुढ होने की राजीव के समय से ही ममता कांग्रेस की आलोचक रहीं। सोच अपनी-अपनी है।
अभिजीत आज के हीरो हैं। उनका वर्णन पहले। कल ही (21 मार्च 2022) नयी दिल्ली ईडी मुख्यालय में अभिजीत की पेशी थी। वे आर्थिक अपराधी हैं। हालांकि वरिष्ट पार्टी पुरोधा सुब्रत मुखर्जी ने अभिजीत को तृणमूल कांग्रेस का शत प्रतिशत सफल नेता करार दिया है। भाजपा की गत वर्ष बंगाल विधानसभा में सत्ता पाने में विफल रहने का श्रेय दूसरे आला नेता पार्थ चटर्जी अभिजीत को ही देते हैं। बुआ की तरह ये सभी पार्टी अगुवा पूर्णतया विप्र वर्ण के हैं। सभी का उपाध्याय उपनाम है। ममता को जाननेवाले लोग अचंभे में रहे। एकदा ममता परिवारवाद की घोर विरोधी थीं। दिल्ली के एक जानकार पत्रकार ने दैनिक ’नया इंडिया’ में अपने स्तंभ (16 मार्च 2015) में लिखा था : ’एक समय ऐसा भी था जब ममता बनर्जी खुलकर परिवारवाद की आलोचना किया करती थीं। अपने परिवार के किसी भी सदस्य को राजनीति में न आने देने की बात करती थीं। ’आप पार्टी’ की तरह राजनीति में नया बदलाव लाए जाने की पैरवी करती थीं। सबसे अहम बात तो यह है कि वे खुद अभिषेक को ज्यादा महत्व दिया जाना पसंद नहीं करती थीं। उसने भले ही 2014 के लोकसभा चुनाव में सोमेन मित्रा को पराजित किया हो पर यह सच भी किसी से छिपा नहीं कि महज एक साल पहले ही ममता उत्तर 24 परगना की एक रैली में भतीजे को अहमियत दिये जाने से बेहद नाराज हो गयी थीं। इस रैली में अभिषेक मुख्य वक्ता था। वहां जो पोस्टर व बैनर लगाये गये थे उन पर ममता बनर्जी के साथ उसकी भी तस्वीर छापी गयी थी। उन दोनों के ही बड़े-बड़े कटआउट भी लगाये गये थे। हवाई अड्डे जाते समय जब ममता की नजर उन पर पड़ी, तो वे बौखला उठीं। उन्होंने अपनी कार रुकवायी और साथ चल रहे पार्टी नेताओं व सुरक्षा कर्मियों को उन्हें फाड़ डालने की हिदायत दी। उन्हें इस बात की नाराजगी थी कि अभिषेक को इतनी अहमियत क्यों दी जा रही है? उन्होंने सारे पोस्टर फड़वाए। वह रैली रद्द करवायी और उसके बाद पार्टी की ओर से लिखित निर्देश जारी किये गये कि भविष्य में किसी भी पोस्टर, बैनर पर ममता बनर्जी के अलावा किसी और का फोटो नहीं छपेगा। उनके अलावा किसी और नेता का कटआउट नहीं लगाया जायेगा।’’ ममता जो ढाई तीन सौ रुपये वाली नीले बार्डर की सफेद साड़ी और हवाई चप्पल के लिये विश्व विख्यात रहीं, अब एकदम बदल गयीं हैं। समय तथा अवसर के साथ। अरबों रुपये के ’नारद’ तथा ’शारदा’ घोटाले में लिप्त पायीं गयीं। मगर उनका का दावा है कि उनके दुश्मनों ने उन्हें फंसाया है। ठीक जैसे उनके गुरु रहे पीवी नरसिम्हा राव कहा करते थे। राव की मंत्रीपरिषद में ममता शिक्षा राज्य मंत्री थीं। बात 1991-95 की है। तब तक ममता की नैतिकता उभार पर थीं। जब वे मुख्यमंत्री बनी तो उनके कभी सहयोगी रहे सांसद कुणाल घोष तथा डीजीपी रजत मजूमदार घोष ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री को कैद किया की जाये क्योंकि वे भी भ्रष्टाचार में आकण्ठ लिप्त है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं आइएफडब्लूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।)

कलमकारों से ..

तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com पर प्रकाशन के इच्छुक कविता, कहानियां, महिला जगत, युवा कोना, सम सामयिक विषयों, राजनीति, धर्म-कर्म, साहित्य एवं संस्कृति, मनोरंजन, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं तकनीक इत्यादि विषयों पर लेखन करने वाले महानुभाव अपनी मौलिक रचनाएं एक पासपोर्ट आकार के छाया चित्र के साथ मंगल फाण्ट में टाइप करके हमें प्रकाशनार्थ प्रेषित कर सकते हैं। हम उन्हें स्थान देने का पूरा प्रयास करेंगे :
जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
E-Mail : jsdwivedi68@gmail.com

आवश्यकता है संवाददाताओं की

तेजी से उभरते न्यूज पोर्टल www.hindustandailynews.com को गोण्डा जिले के सभी विकास खण्डों व समाचार की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों तथा देवीपाटन, अयोध्या, बस्ती तथा लखनऊ मण्डलों के अन्तर्गत आने वाले जनपद मुख्यालयों पर युवा व उत्साही संवाददाताओं की आवश्यकता है। मोबाइल अथवा कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग का ज्ञान होना आवश्यक है। इच्छुक युवक युवतियां अपना बायोडाटा निम्न पते पर भेजें : jsdwivedi68@gmail.com
जानकी शरण द्विवेदी
सम्पादक
मोबाइल – 9452137310

RELATED ARTICLES

Most Popular