डा. चन्द्र गोपाल पाण्डेय
आज माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने गौ संवर्धन और गौ हत्या पर प्रतिबंध को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। इस निर्णय में जहां वेद शास्त्र, पुराण, रामायण और महाभारत को उद्धृत करते हुए गाय की महत्ता पर बल दिया गया है, वहीं वर्तमान में गौशाला व गायों की देखभाल पर भी गंभीर चिंता माननीय न्यायालय ने व्यक्त की है। न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने यह निर्णय गौ हत्या के एक आरोपी की जमानत प्रार्थना पत्र को निरस्त कर करते हुए हिंदी में दिया है। निर्णय में कहा गया है कि “…गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गौ सुरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार में रखा जाए क्योंकि हम जानते हैं कि जब देश की संस्कृति व आस्था पर चोट होती है तो देश कमजोर होता है।“ इसी निर्णय में यह भी कहा गया है कि गाय का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है तथा गाय को भारत देश में मां के रूप में जाना जाता है और उसकी देवता के रूप में पूजा की जाती है। …गाय हिंदुओं की आस्था और हिंदू संस्कृत का प्रतीक है। ….हिंदू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं। निर्णय में स्वामी दयानंद सरस्वती को उद्धरित करते हुए कहा गया है कि एक गाय अपने जीवन काल में 410-440 मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटाती है और उसके मांस से केवल 80 लोग अपना पेट भरते हैं।
निर्णय में गाय की महत्ता का जिक्र इस तरह किया गया है-“ऋग्वेद में गाय को अघन्या, यजुर्वेद में गाय को गौर अनुपमेय, अथर्ववेद में गाय को संपत्तियों का घर कहा गया है। भगवान श्री कृष्ण को सारा ज्ञान गौ चरणों से ही प्राप्त हुआ है। भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप नंदिनी गाय की पूजा करते थे। भगवान शंकर का वाहन नंदी, गाय वंशज ही थे। तीर्थंकर भगवान रामदेव का चिन्ह बैल है।9,500 वर्ष गुरु वशिष्ठ ने गाय के कुल का विस्तार किया था। स्कंद पुराण के अनुसार गौ सर्व देवमयी और वेद में गाय सर्व गौमय है। भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमदभगवत गीता में कहा है कि गायों में मैं कामधेनु हूं। ईसा मसीह ने कहा कि एक गाय या बैल को मारना मनुष्य को मारने के समान है। गुरु गोविंद सिंह ने कहा है “यही देहु आज्ञा तुरुक को खपाऊँ, गौ माता का दुख सदा मैं मिटाऊँ।“ बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि चाहे मुझे मार डालो पर गाय पर हाथ ना उठाओ। कवि रसखान ने कहा कि यदि मेरा दोबारा जन्म हो तो मैं बाबा नंद के गायों के बीच में जन्म लूं। पंडित मदन मोहन मालवीय ने संपूर्ण गोवध हत्या की निषेध की वकालत की थी। महर्षि अरविंद ने भी गाय वध को पाप माना। भगवान बुद्ध गायों को मनुष्य का मित्र बताते है। जैनों ने गाय को स्वर्ग कहा है। गांधीजी ने गोवंश की रक्षा को भगवान से जोड़कर कहा।…“ निर्णय में कहा गया कि मुस्लिमों ने भी गोहत्या का विरोध किया है-“मुसलमानों ने भी गाय को भारत की संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए अपने शासनकाल में मुसलमान शासकों द्वारा गायों के बध पर रोक लगाया था। बाबर, हुमायूं और अकबर ने भी अपने धार्मिक त्योहारों में गायों की बलि पर रोक लगाई थी। मैसूर के नवाब हैदर अली ने गौ हत्या को एक दंडनीय अपराध बना दिया था। 1953 में उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा गठित गोसंबर्धन समिति के तीन सदस्य मुस्लिम थे और गाय के बध को पूर्ण प्रतिबंध के समर्थक थे।…….“ आगे कहा गया है“…….गैर हिंदू नेताओं ने मुगल काल में हिंदू भावनाओं की कद्र करते हुए गोवध का पुरजोर विरोध किया जिनमें मौलाना मोहम्मद अली, शौकत अली, हकीम अजमल खान ,मियां हाजी अहमद खत्री, मियां छोटानी ,मौलाना अब्दुल बारी, मौलाना अबुल हुसैन और अहमद मदनी जैसे राष्ट्रवादी मुसलमानों ने गौ हत्या न करने की अपील की। …..“
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न्यायालय में कहा है कि गौ रक्षा के हित में कानून बनाने में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है- “भारतीय संविधान भी इसकी संरक्षण की बात करता है ।समय समय देश की विभिन्न न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय ने भी गाय की महत्ता को समझते हुए इसके संरक्षण, संवर्धन एवं देश के लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए तमाम निर्णय दिए हैं और संसद एवं विधान सभा ने भी समय के साथ नए नियम गायों की रक्षा हित में बनाए हैं जिसमें उत्तर प्रदेश उस में अग्रणी है।“ वर्तमान में गौशाला व गायों के रखरखाव पर कहा है-“किंतु कभी-कभी यह देख कर बहुत कष्ट होता है कि गाय संरक्षण और संवर्धन की बात करने वाले ही गाय के भक्षक बन जाते हैं ।सरकार भी गौशाला का निर्माण तो कराती है किंतु उसमें गाय की देखभाल करने वाले लोग ही गाय का ध्यान नहीं रखते हैं। इसी प्रकार प्राइवेट गौशाला भी आज केवल एक दिखावा बनकर रह गई है जिसमें लोग गाय संवर्धन के नाम से जनता से चंदा और सरकार से सहायता तो लेते हैं किंतु उनको गाय के संवर्धन और उसकी देखभाल में न लगाकर स्वार्थ हित में खर्च करते हैं ।ऐसे तमाम उदाहरण देखने को मिलते हैं जहां गाय गौशाला में भूख और बीमारी के कारण मर जाती है या तो मरणासन्न अवस्था में है। गंदगी के बीच उनको रखा जाता है। खाने के अभाव में गाय पॉलिथीन खाती है और नतीजन बीमार होकर मर जाती है। सड़क, गलियों में गाय जिन्होंने दूध देना बंद कर दिया है, उनकी बुरी हालत देखने को मिलती है। बीमार और अंग-भंग गाय अक्सर लावारिस देखने में नजर आती हैं। ऐसी स्थिति में यह बात सामने आती है कि गाय के संरक्षण संवर्धन करने वाले लोग क्या कर रहे हैं। कभी-कभार 1-2 गाय के साथ फोटो खिंचाकर वह समझते हैं कि उनका काम पूरा हो गया है, किंतु ऐसा नहीं है। सच्चे मन से गाय की सुरक्षा और उसकी देखभाल करनी होगी तथा सरकार को भी इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा।“
(माननीय उच्च न्यायालय का सम्पूर्ण निर्णय “दाण्डिक प्रकीर्ण जमानत आवेदन पत्र संख्या 22400 वर्ष 2021“ पढ़ा जा सकता है।)
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