कांग्रेस का आरोप,सैनिकों को सुविधाएं देने की बात आती है तो भाजपा उन्हें नजरअंदाज करती है
वाराणसी (हि.स.)। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और वरिष्ठ नेता विजेन्द्र सिंह ने शुक्रवार को केन्द्र सरकार और भाजपा पर जमकर निशाना साधा। सुप्रिया ने कहा कि मोदी सरकार ने सेना शौर्य के नाम पर वोट लेकर सेना के हितों पर गहरा चोट किया है। भाजपा सैनिकों और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट मांगती है। जब सैनिकों को सुविधाएं देने की बात आती है तो ये पार्टी उन्हें नजरअंदाज कर देती है।
मैदागिन स्थित पार्टी के कार्यालय में जिला एवं महानगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रेसवार्ता में सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जब भी हम अपनी सेनाओं को याद करते हैं, तब-तब हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। मगर मोदी सरकार और भाजपा एक तरफ़ तो सेना की कुर्बानी और शौर्य का इस्तेमाल अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए करते हैं, और दूसरी ओर सेना और सैनिकों के हितों पर कुठाराघात भी करते हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने 30 लाख सैनिकों की पेंशन को हर साल रिवाईज़ करने की मांग को भी नकार दिया। सरकार ने इस समय अवधि को 5 साल कर दिया। ओआरओपी को ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की बजाय ‘वन रैंक, पांच पेंशन’ बना दिया। केन्द्र सरकार को इतिहास में अब तक कि सबसे भ्रष्ट व विफल सरकार बता दोनों नेताओं ने सैनिकों के हितों व उन्हें पहले से दी जा रही सरकारी सुविधाओं व बजट में कटौती से जुड़ी एक पुस्तिका का लोकार्पण किया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दावा किया कि पुस्तिका में मोदी सरकार की सेना से जुड़ी कारगुजारियों का पूरा चिट्ठा है । उन्होंने बताया कि 13 दिसंबर, 2021 को रक्षा मंत्रालय ने संसद को बताया कि तीनों सेनाओं में 1,22,555 पद खाली पड़े हैं, जिसमें से लगभग 10,000 पद सैन्य अधिकारियों के हैं। जिन्हें भरा नहीं गया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार ने सन 2004 से 2012 के बीच तीन बार भूतपूर्व सैनिकों की पेंशन बढ़ाई, जिससे उन्हें रुपये 7,000 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक फायदा हुआ। 17 फरवरी 2014 को कांग्रेस सरकार ने आदेश जारी कर एक अप्रैल 2014 से से ओआरओपी को मंज़ूर किया। इसमें तय किया कि एक समान समय तक सेवा करने के बाद एक ही रैंक से रिटायर होने वाले सभी सैनिकों को एक समान पेंशन दी जाए, फिर चाहे उनकी रिटायरमेंट की तारीख अलग-अलग क्यों न हो, और भविष्य में पेंशनवृद्धि का लाभ भी पुराने पेंशनधारकों को मिले।
कांग्रेस सरकार के आदेश नकारते हुए मोदी सरकार ने सात नवम्बर 2015 को नया आदेश निकाल सेना के 40 फीसदी प्रतिशत सैनिकों से ओआरओपी पूरी तरह से छीन लिया। सरकार ने अपने आदेश में कहा कि इन तीनों सेनाओं में एक जुलाई 2014 के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले सैन्य कर्मियों को ‘वन रैंक, वन पेंशन’ नहीं मिलेगा।
– मोदी सरकार ने सैनिकों की ‘डिसएबिलिटी पेंशन’ पर टैक्स लगाया
कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया ने कहा कि अगर कोई सैनिक सेवा में रहते घायल होने पर समय से पहले रिटायरमेंट लेता है, तो वह डिसएबिलिटी पेंशन का हक़दार होता है। मोदी सरकार ने 24 जून, 2019 से सैनिकों की इस पेंशन पर भी बेशर्मी से टैक्स लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी, मगर बेशर्मी से मोदी सरकार आज भी यह केस सुप्रीम कोर्ट में सैनिकों के खिलाफ़ लड़ रही है। इसी तरह सातवें वेतन आयोग में सेनाओं से सौतेला व्यवहार हो रहा है।
श्रीधर
