– सीएमओ को बगैर सूचना के ही लगाया था मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर
कानपुर (हि.स.)। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद छह लोगों के आंखों की रोशनी चली गई। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजकर चार सप्ताह में जांच रिपोर्ट मांगी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आलोक रंजन ने आराध्या आई अस्पताल के डॉ. नीरज गुप्ता को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले में जवाब मांगा है। नोटिस का जवाब देने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
सीएमओ ने बताया कि पीड़ित राजाराम ने पूछताछ में बताया कि सुघरदेवा गांव के सभी छह लोग दोपहर करीब तीन बजे अस्पताल पहुंचे थे। वहां पर कुल 18 लोगों के ऑपरेशन किए जाने थे। डॉक्टर ने बिना कोई जांच किए आंखों का ऑपरेशन शुरू कर दिया और शाम छह बजे घर भेज दिया। इसके बाद उसने मरीजों की देखरेख की कोई आवश्यकता ही न समझी। जबकि पीड़ित दर्द और आंखों से न दिखने की शिकायत कई बार की।
सीएमओं की जांच टीम ने छह बुजुर्गों की रोशनी छीनने वाले डॉ.नीरज गुप्ता और आराध्या आई हॉस्पिटल की नए सिरे से फिर जांच शुरू कर दी है। लापरवाही की पुष्टि के बाद अब जांच टीम ने संक्रमण का पता लगाने को जांच शुरू की है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम के साथ जांच टीम ने हॉस्पिटल और उसके ऑपरेशन थिएटर के नमूने एकत्र किया है।
पूरे प्रकरण की जांच कर रही कमेटी के अध्यक्ष एसीएमओं डॉ. एस के सिंह ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग के नॉन पीजी जेआर की टीम के साथ आराध्या अस्पताल को खुलवा कर उसके गैलरी, ओटी के छह नमूना लिया गया है। जिसकी जांच के लिए लैब भेजा गया है। लैब में भेजे गए नमूनों में संक्रमण का परीक्षण किया जाएगा। यदि संक्रमण की पुष्टि हुई तो आराध्या का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
सीएमओ ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को चार हफ्तों में विस्तृत जवाब देने के लिए कहा है। आयोग ने मुआवजा दिए जाने और पीड़ितों से 1500 रुपये की वसूली के संबंध में जानकारी मांगी है। पुलिस की कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब की है।
राम बहादुर
