Saturday, March 28, 2026
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 मैत्रेय परियोजना की 409 एकड़ भूमि का होगा डी नोटिफिकेशन

-145 एकड़ पर बनेगा कृषि विश्विद्यालय

कुशीनगर (हि. स.)। निरस्त मैत्रेय परियोजना की पार्ट-2 की लगभग 409 एकड़ भूमि किसानों को वापस होने की सम्भावना बन रही है। कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने इसके संकेत दिए हैं। दरअसल मैत्रेय परियोजना के लिए साल 2003 में कुल 660.57 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी। पार्ट वन 250 एकड़ भूमि है। 195 एकड़ भूमि का मुआवजा वितरित कर दिया गया है। 55 एकड़ भूमि जिगजैग (टुकड़े-टुकड़े) में है। पार्ट वन की इस भूमि के 145 एकड़ भूमि पर महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय बनेगा। सात जुलाई को प्रधानमंत्री इसकी आधारशिला रखेंगे।

कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बनाए जाने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय व प्रशासनिक संस्तुति करने के साथ 750 करोड़ का बजट खर्च करने की मंजूरी दे दी है।

साल 2003 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कसया तहसील के बेलवा पलकधारी, सबया, कसया, विशुनपुर विन्दबलिया, अनिरूध्वा, सिसवां, डुमरी गांव की कुल 660.57 एकड़ भूमि का अधिग्रहण मैत्रेय परियोजना के लिए किया था। भूमि के मुआवजा के लिए एक अरब रुपए का प्राविधान किया गया था। परियोजना से इन गांवों के कुल 2500 किसान प्रभावित हुए थे। साल 2013 में अखिलेश यादव सरकार ने पार्ट वन की भूमि पर मुआवजा भुगतान कर मैत्रेय परियोजना का शिलान्यास किया। परियोजना के तहत मैत्रेय ट्रस्ट को बुद्ध की 200 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा की स्थापना सहित पर्यटन विकास , शैक्षणिक व स्वास्थ्य आदि के आधारभूत संसाधनों की स्थापना के कार्य किये जाने थे। किंतु ट्रस्ट आठ साल की अवधि के भीतर एक कार्यालय भवन की स्थापना करने के अलावा और कोई कार्य नहीं कर सका।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने साल 2021 में मैत्रेय परियोजना की समीक्षा करने के बाद ट्रस्ट से हुआ एमओयू (मेमोरंडम आफ अंडरस्टैंडिंग) निरस्त कर दिया। वैसे तो किसान मैत्रेय की लांचिंग के समय से ही इसे फर्जी बताते हुए निरस्त करने की मांग कर रहे थे। 2013 के बाद पार्ट टू से संबंधित सिसवां, डुमरी, अनिरूध्वा के किसान लगातार अपनी भूमि को डीनोटिफाई करने की मांग कर रहे हैं। किसान नेता व भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोवर्धन प्रसाद गोंड का कहना है कि पार्ट टू की भूमि मुक्त होनी चाहिए। 20 साल से किसान अधर में लटके हैं। किसान न तो भूमि बेच सकते हैं और न ही भूमि पर ऋण लेकर खेती-बाड़ी कर सकते हैं।

सोमवार को कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने शेष भूमि के सम्बंध में बताया कि किसान जो चाहते हैं, वही होगा। उन्होंने मैत्रेय को फर्जी संस्था बताया। किसानों की इस स्थिति के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने बिना जाने-समझे किसी ठोस आधार के इतना बड़ा निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय से एक करोड़ किसानों को फायदा होगा। कृषि विकास के दूरगामी हित सधेंगे।

गोपाल/बृजनंदन/सियाराम

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