Tuesday, January 13, 2026
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मेढ़ बनाकर करें प्याज की खेती, सहफसली के रूप में लगाएं धनिया व मूली, होगा काफी फायदा

 उपनिदेशक उद्यान ने कहा, पौध लगाने से पहले मिट्‌टी को कर लें उपचारित

लखनऊ (हि.स.)। रवी की प्याज की रोपाई को मौसम चल रहा है। कहीं रोपाई हो चुकी है तो कहीं चल रही है। इस संबंध में विशेषज्ञों की मानें तो इसकी रोपाई मेढ़बंदी कर किया जाय तो बेहतर होगा। मेढ़बंदी से बारिश होने पर भी नुकसान की संभावना कम हो जाती है। 

इसके साथ ही सहफसली के रूप में धनिया, मूली, मेथी लगाया जा सकता है। यदि सहफसली खेती करना हो तो प्याज के मेढ़ की दूरी डेढ़ फिट होना चाहिए। यदि सिर्फ प्याज लगानी है तो प्याज से प्याज के बीच की दूरी खुरपी अर्थात लगभग छह इंच की होनी चाहिए, जिससे उसकी निराई की जा सके।

इस संबंध में उद्यान विभाग के उपनिदेशक अनीस श्रीवास्तव का कहना है कि प्याज की खेती यदि मेढबंदी कर किया जाय तो प्याज की गांठ अच्छी होती है और उपज बढ़ जाएगी। इससे एक तो प्याज की गांठ को अच्छी मिट्‌टी मिलेगी और यदि वह कड़ी कम होगी तो उपज अधिक होगी। उन्होंने बताया कि यदि सहफसली के रूप में खेती करनी है तो कम से कम मेढ़ के बीच की दूरी डेढ़ फिट की होनी चाहिए। इसके बीच में यदि धनिया, मूली अथवा मेथी लगा दी जाय तो बेहतर होगा।

उन्होंने कहा कि अब एक फसल लगाकर सालभर इंतजार करना ठीक नहीं है। आमदनी के लिए जरूरी है कि सहफसली खेती की जाय। इससे यदि एक फसल में कम आमदनी हो तो दूसरी से इसकी भरपाई हो जाती है। उन्होंने कहा कि प्याज 140 से 145 दिन में तैयार हो जाने वाली फसल है। इसके साथ ही धनिया (कटिंग वाली), मूली आदि 40 दिन में तैयार हो जाने वाली फसल है।उन्होंने कहा कि प्याज की रोपाई के समय ट्राइकोड्रमा में ट्रीप करना उपयुक्त नहीं होता है। रोपाई से पहले खेत में उर्वरक डालकर उसमें क्यारियां बनाना ठीक होता है। उन्होंने कहा कि प्याज की खेती करते समय मिट्टी की जांच जरूर करा लें, जिससे सही मात्रा में उर्वरक डालते हैं। रोगों से बचाव रोगों से बचाव के लिए बीज और पौधशाला की मिट्टी को कवक नाशी या थीरम आदि से उपचारित कर लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रोपाई से पूर्व पौधों की जड़ों को कार्बेंडाजिम, नौ प्रतिशत के घोल में डूबा देना चाहिए। प्याज लगाने से पूर्व मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिए। एक हेक्टेयर खेत में 20 से 25 तक गोबर की खाद रोपाई से एक माह पूर्व ही खेत में मिला देना चाहिए। अच्छे उत्पाद के लिए प्रति हेक्टेयर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किग्रा पोटाश की आवश्यकता पड़ती है। गंधक और जिंक की कमी होने पर ही उपयोग करें।

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