लखनऊ (हि.स.)। समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय में शनिवार को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से बिजनौर जिले से आए किसानों ने अपनी समस्याएं बतायी। किसान समूह की समस्याएं सुनकर मुलायम ने 2022 तक के इंतजार की बात कही।
समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपराह्न बाद प्रदेश कार्यालय पहुंचें। मुलायम सिंह यादव से मिलकर अपनी बात करने वाले लोगों का तांता लगा रहा। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नेता, कार्यकर्ताओं ने पार्टी संरक्षक से मुलाकात की। इसी दौरान बिजनौर से आए सिख किसानों के समूह ने मुलायम सिंह से मिलकर वर्तमान समय में बढ़ी महंगाई, फसलों का मूल्य ना मिलने और तमाम समस्या से मजबूर हो कर खेती करने की बात कही।
मुलायम सिंह यादव से मिलकर समाजवादी पार्टी कार्यालय से निकले बिजनौर जिले के किसान लखबीर सिंह और उनके साथी किसानों ने हिंदुस्थान समाचार से कहा कि जब से यह सरकार आयी है, अनाज बेचना मुश्किल हो गया है। 16 सौ रुपये गेहूं और 12 सौ धान धक्का खा रहा है। गन्ना का रेट भी चार साल से वही टिका हुआ है। डीजल 90 रुपये पहुंच गया है और पेट्रोल सौ रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। खाद्य, दवाईयों का रेट कहां से कहां तक पहुंच चुके है।
उन्होंने कहा कि खेती करना दुस्वार हो गया है। किसान कर्जे में डूबे पड़े हैं। बच्चों के शिक्षा का खर्च कैसे निकाले, बीमार हो जा रहे हैं। महंगाई का प्रभाव तो हर एक चीज पर पड़ा है। एक तो कहते है जय जवान जय किसान, किसान देश के रीढ़ की हड्डी है। दूसरी तरफ किसान के रीढ़ के हड्डी को ही तोड़ने का काम कर दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार से किसानों को कोई सुविधा नहीं मिली है। कहते जरुर हैं कि हमने जगह-जगह पर सेंटर लगा दिया है। किसान के 10 एकड़ धान में छह सात एकड़ ही तय करते हैं, और जो धान निकलता है उससे भी आधा लेते है। वो भी टालियां खड़ी रहती है, धक्के खाती है। जमीन स्तर पर काम नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी लोगों की सैलेरी बढ़ गयी लेकिन किसान तो आज भी उतनी ही रकम पा रहा है। सरकार कहती है, करती कुछ नहीं। हमें हमारा समर्थन मूल्य मिलना चाहिए। आने वाले वक्त में समस्या बढ़ेगी, इसके लिए ये आंदोलन चल रहा है।
सरकार से मिल रही राशि पर उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार के छह हजार रुपयों की जरुरत नहीं, हमें जो हमारी फसल का सही मूल्य मिल जाए। किसी रोते हुए इंसान के आंसू पोछने से दिल ठंडा नहीं हो जाता है। किसानों के दर्द को सरकार समझने की कोशिश करे। आज की डेट में छह हजार रुपये क्या है, कुछ भी नही है।
