लखनऊ (हि.स.)। प्रदेश में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए योगी सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत अब सरकार के कार्यक्रमों, निर्णयों की प्रेस विज्ञप्तियां संस्कृत में भी जारी की जाएंगी। इस पर अमल शुरू भी हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकारी प्रेस विज्ञप्तियां संस्कृत भाषा में भी जारी की जा रही हैं। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री की कोरोना को लेकर वरिष्ठ अफसरों के साथ प्रतिदिन की जाने वाली समीक्षा बैठक से की गई। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ट्विटर पर शेयर भी किया गया। इसे संस्कृत प्रेमियों द्वारा बड़ी संख्या में सराहा भी गया। रविवार को भी शासन की प्रेस विज्ञप्तियां अन्य भाषाओं के साथ संस्कृत में भी जारी की गई।
इसके लिए विभाग ने दो संस्कृत भाषा के जानकारों को जिम्मेदारी सौंपी है। हालांकि प्रयोग के तौर पर पहले भी संस्कृत के प्रेस नोट जारी हुए थे। लेकिन, अब यह कार्य नियमित तौर पर किया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से हिंदी व अंग्रेजी में पहले से ही नियमित प्रेस विज्ञप्ति जारी होती हैं। सरकार की इस पहल से संस्कृत भाषा को बढ़ावा मिलेगा और संस्कृत के छात्रों का उत्साहवर्धन होगा।
दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संस्कृत भाषा के लिए उत्थान और विकास के पक्षधर हैं। उनकी सरकार के तीसरे बजट में संस्कृत की उच्च शिक्षा के लिए काशी विद्यापीठ को अनुदान के लिए 21 करोड़ रुपये और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए 21.51 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई थी।
इसके अलावा योगी सरकार संस्कृत की पढ़ाई कर रहे छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप में भी इजाफा कर चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहा है। संस्थान संस्कृत विषय लेकर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों को निःशुल्क कोचिंग एवं स्कालरशिप भी प्रदान कर रहा है।
मुख्यमंत्री योगी का संस्कृत प्रेम किसी से छिपा नहीं है। इस वर्ष फरवरी माह में लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘भारतीय भाषा महोत्सव’ के उद्घाटन के दौरान उन्होंने संस्कृत के महत्व को लेकर अपने विचार रखे थे।
उन्होंने कहा था कि बहुत समय पहले, भारत के ऋषियों ने संस्कृत को रोजगार से जोड़ा। यदि संस्कृत पढ़ने वाला व्यक्ति अपनी बुद्धि का सही उपयोग करता है, तो वह कभी भी भूख से नहीं मरेगा। संस्कृत का जानकार व्यक्ति जब पुरोहित का कार्य करता है तो लोग उसे दक्षिणा भी देते हैं और पैर भी छूते हैं। इससे बड़ा सम्मान नहीं हो सकता।
वहीं केन्द्र सरकार के स्तर से भी संस्कृत को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की राज्यपाल आंनदीबेन पटेल भी बीते दिनों राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भूमिका पर राज्यपालों के सम्मेलन में कह चुकी हैं कि इसमें देश की प्राचीनतम भाषा संस्कृत की महत्ता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

