बांदा (हि.स.)। जनपद में बिना किसी भय के प्रतिबंधित मशीनों के जरिए हो रहे बालू खनन पर मुख्यमंत्री की नजरें टेढ़ी हो जाने और इस पर जांच के आदेश दिए जाने से खनिज विभाग से लेकर बालू माफियाओं में खलबली मच गई है। जांच में कई ऐसे चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं जो सत्ता की आड़ में बालू खनन के कारोबार से मालामाल हो रहे हैं।
जनपद में जिस तरह से शासन की गाइडलाइन को दरकिनार कर बालू के पट्टा धारक मशीनों से अवैध खनन करा रहे हैं उससे बांदा जिले की जीवन रेखा केन नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। जिले की अधिकांश बालू खदानों में जगह जगह गहरे गड्ढे बना दिए गए हैं। जिसमें आए दिन मौत हो रही हैं। मशीनों के जरिए हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं लेकिन प्रशासन की ओर से किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं की गई। जिससे बालू पट्टा धारकों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
इधर, बुधवार को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बांदा पहुंचे। जनसभा के बाद समीक्षा की और करोडो रुपए की परियोजनाओं का शिलान्यास लोकार्पण किया। समीक्षा बैठक में ही उन्होंने जिस तरह अवैध खनन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए उससे खनन विभाग से संबद्ध अधिकारियों और बालू पट्टा धारकों में खलबली मच गई है। मुख्यमंत्री के कड़े तेवर से सत्तापक्ष से जुड़े उन नेताओं की नींद भी हराम हो गई है जो बालू खनन में लिप्त बताए जा रहे हैं।
यह नेता ऐसे विभीषण की खोजबीन में जुटे हैं जिसने जनपद में अ्वैध बालू खनन की खबर मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंचाई है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर दो बार जिले में इधर से उधर गया है इस दौरान संभवत नदियों के आसपास खड़े सैकड़ों ट्रकों और मशीनें उन्होंने देखी हैं। तभी उन्होंने बालू अवैध बालू खनन की जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने बांदा से वापस आने के बाद लखनऊ में खनन और गृह विभाग की टीम जांच के लिए भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं। अगर जांच शुरू हुई तो खनिज विभाग और पट्टा धारकों के बीच घालमेल का भांडा फूट सकता है और कई सत्ता पक्ष के नेता भी लपेटे में आ सकते हैं। यह ऐसे नेता हैं जो पर्दे के पीछे रहकर बालू खनन में लिप्त बताए जा रहे हैं। बताते चलें कि, शासन के निर्देश पर घाटों पर सीसीटीवी कैमरे और धर्मकांटा दिखावे के लिए लगे है। घाटों की कलई तब खुलती है जब जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासनिक अफसरों की टीम पहुंचती है या फिर खुद डीएम निरीक्षण करते हैं। कनवारा व बेंदा में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आनंद कुमार सिंह ने कई कमियां पकड़ी थीं। कड़े निर्देश दिए थे और ओवरलोड वाहन सीज कराए गए थे।
अवैध खनन में जा चुकी हैं जानें
इस बीच पोकलैण्डमशीनों द्वारा नियमों के विपरीत नदी के अंदर गहराई तक खुदाई करने से बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं जिसमें दुर्घटनाएं हो रही हैं। पिछले महीने बिसंडा थाना क्षेत्र के भदावल गांव में बालू का टीला धंसने से दो बच्चों की मौत हो गई थी इसी तरह कल दुरेडी खदान में नहाते समय कर दो बच्चे बालू खनन में खोदे गए गड्ढे में समा गए थे। लेकिन लोगों ने जान पर खेलकर दोनों बच्चों को बचा लिया।
नरैनी के पांडादेव गांव में अवैध खनन के दौरान टीला धंसने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। जमकर हंगामा हुआ। माफिया फूलमिश्रा समेत कई नामजद हुए थे। हाल के दिनों में मौरंग का टीला धंसने से पैलानी में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
