Friday, March 27, 2026
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मुख्यमंत्री के ट्वीट ने कर दिया इशारा, चुनाव में “राष्ट्रवाद” का भाजपा लगाएगी नारा

-जातिगत आधार पर बहुसंख्यक समाज को तोड़ने की फिराक में लगे विपक्ष को मुख्यमंत्री ने दिया है करारा जवाब

लखनऊ (हि.स.)। विपक्ष की चाल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करारा जवाब देते हुए पूरे समाज की एकजुटता के लिए बड़ा बयान दिया। मुख्यमंत्री ने सामाजिक एकजुटता पर जोर देते हुए बहुसंख्यक समाज को तोड़ने वाली राजनीति को घृणित बताया। इस पर राजनीतिक जानकारों को मानना है कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विपक्ष के ऊपर “नहले पर दहला” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा किया गया ट्वीट यह भी बता रहा है कि भाजपा का एक प्रमुख मुद्दा राष्ट्रवाद रहेगा।

योगी आदित्यनाथ द्वारा 12 ट्वीट किये गये। सभी समाज व संस्कृति को लेकर विपक्ष पर किया गया वार था। इसके बावजूद छोटी-छोटी बातों पर घेराबंदी करने वाले विपक्ष का इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं आया। योगी आदित्यनाथ ने एक ट्वीट किया कि जो भी राष्ट्रधर्म के मूल्यों को रौंदकर अपने स्वार्थ के लिए सत्ता की चाटुकारिता करता हुआ दिखाई देगा, समाज उसको कूड़ेदान में फेंककर हमेशा के लिए भुला देगा।

इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हर्षवर्धन त्रिपाठी का कहना है कि आज योगी आदित्यनाथ ने जो भी मुद्दा उठाया है। उसमें पूरी सत्यता है। उसका विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं है। अब कोई झूठ का पुलिंदा गढ़ दे तो उस संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन वामपंथियों के कारण अकबर को महान कहा गया। इस सत्य को कौन झुठला सकता है।

इस संबंध में राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि योगी आदित्यनाथ का यह ट्वीट भाजपा को गाइड लाइन दे दिया। इससे पता चलता है कि यूपी का अगला चुनाव राष्ट्रवाद पर भाजपा लड़ने जा रही है। विकास के साथ ही राष्ट्रवाद का नारा भी भाजपा जोर-शोर से उठायेगी। आने वाला चुनाव धार्मिक ताने-बाने से बुना जाएगा। इसमें भाजपा जहां धर्म का सहारा लेगा, वहीं विपक्ष जातियों को तोड़ने के फिराक में पड़ेगा लेकिन जातियों को तोड़ने में अभी तक विपक्ष को कामयाबी मिलती नहीं दिख रही है।

सोमवार को योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्वीट के माध्यम से बहुसंख्यक समाज के हर तबके को लिया है। बनारस के डोम राजा का भी जिक्र किया है, जिनको विपक्ष ने कभी सम्मान नहीं दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें पद्मश्री के पुरस्कार से नवाजा। उन्होंने महाराजा सुहेलदेव का भी जिक्र किया। इसके साथ ही अनुसूचित जनजाति को समाज की नींव बताया।

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