Tuesday, April 7, 2026
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 मिलेट्स में मानव व मिट्टी को सुरक्षित रखने की गारंटी : डॉ संजय सिंह

-श्री अन्न में छिपा है पोषण का खजाना : प्रो.जीएस तोमर

प्रयागराज (हि.स.)। मिलेट्स भूमि की उर्वरा शक्ति बढाने में योगदान करता है, साथ ही इसकी खेती पर्यावरण को भी संरक्षित करती है। श्री अन्न क्लाइमेट रजिस्टेंट है जिससे प्रतिकूल जलवायु में भी मिलेट्स का आसानी से उत्पादन हो जाता है। मिलेट्स की एक बड़ी खूबी ये है कि इसे केमिकल के बिना कम वक्त मे सूखा ग्रस्त क्षेत्र मे भी प्राकृतिक तरीके से उगाया जा सकता है। यानी मिलेट्स मानव और मिट्टी, दोनों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने की गारंटी देते हैं।

यह बातें मुख्य अतिथि पारि पुनर्स्थापन वन अनुसन्धान केंद्र प्रयागराज के निदेशक डॉ. संजय सिंह ने शनिवार को गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान प्रयागराज एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में “श्री अन्न एवं सुपोषण“ विषय पर वैज्ञानिक संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कही।

विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो (डॉ.) जी एस तोमर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स इयर के चलते पूरे विश्व में श्री अन्न के प्रति किसानों और आम नागरिकों में जागरूकता पैदा की जा रही है। श्री अन्न भारत मे समग्र विकास का माध्यम बन रहा है और भारत मिलेट्स ईयर की अगुवाई कर रहा है। जब हम किसी संकल्प को लेकर आगे बढ़ते है तो उसे मंज़िल तक पहुंचाना भी जरूरी है। स्वास्थ्य और पोषण की दृष्टि से श्री अन्न बहुत महत्वपूर्ण है। श्री अन्न प्राचीन काल से हमारे एग्रीकल्चर, कल्चर और सिविलाइज़ेशन का हिस्सा रहे हैं।

प्रो. तोमर ने बताया कि मिलेट्स वर्ष का प्रमुख उद्देश्य लोगों में श्री अन्न के प्रति जागरूकता पैदा करना और इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे श्री अन्न खेत से लेकर आम आदमी की थाली में आ सके। भारत में बाजरा, ज्वार, सावा, कुटकी, कोदो, रागी, कंगनी, चीना, कुट्टू प्रमुख रूप से पैदा किए जाते हैं जिनका आयुर्वेद ग्रंथो और निघंटुओं मे क्षुद्र धान्य या तृण धान्य के रूप मे वर्णन है। डॉ तोमर ने कहा कि शीघ्र ही इन पोषक अनाज से बनने वाले विभिन्न पकवान के लिए कार्यशाला का आयोजन महिलाओं के लिए किया जाएगा।

प्रतापगढ़ से आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीश पाण्डेय ने बताया कि श्री अन्न विशुद्ध जैविक है। क्योंकि रासायनिक खाद कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाता है। श्री अन्न ग्लूटेन रहित होता है जिससे यह आसानी से पच जाता है। इसके साथ ही कोलन कैंसर, सिलियक डिजीज से भी बचाव करता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी हैं। ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता, ओज को बढ़ाते हैं, बलकारी हैं।

मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पूर्व शोध अधिकारी डॉ शांति चौधरी ने कहा कि महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना होगा। आज दो में से एक महिला आयरन की कमी से ग्रसित है। गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम आयरन सप्लीमेंट के रूप में देना पड़ता है, बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। श्री अन्न इन सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है। क्योंकि इसमे मौजूद आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, फाइबर एवं अन्य न्यूट्रिएंट्स लाभकारी हो सकते हैं। श्री अन्न एनीमिया, मोटापा, मधुमेह, कैंसर, हार्ट डिसीज, हाइपरटेंशन, कोरोनरी कोलेस्ट्रॉल की समस्या ओस्टियोआर्थराइटिस एवं अन्य लाइफस्टाइल डिसऑर्डर में लाभकारी हो सकता है। कैल्शियम अधिक होने से हड्डियों को मजबूत बनाता है।

जीबी पंत के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ चन्द्रैया ने बताया कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, आजीविका सुरक्षा, जलवायु सुरक्षा के लिए एक बार फिर मोटा अनाज समय की मांग है। डॉ बी एस रघुवंशी ने कहा कि हमने मोटा अनाज, गरीबों का अनाज कहकर जिसे नकार दिया, आज सुपरफूड बनकर अपनी पहचान बना रहा है। इस अवसर पर राजेन्द्र कुमार सिंह एवं अनुराग अष्ठाना के एजीआर ग्रुप द्वारा स्टार्टप के रूप में निर्मित “श्री धान्यम्” मल्टीग्रेन आटे का भी लोकार्पण अतिथियों ने किया।

विद्या कान्त

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