फर्रुखाबाद(हि.स.)। जिले के कायमगंज में गुरुवार को दुर्लभ प्रजाति का गिद्ध मिलने से भीड़ जमा हो गई। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इसे कानपुर के चिड़ियाघर भेजा जाएगा।
गंगा-यमुना के मध्य बसे जनपद फर्रुखाबाद में कभी बहुत पहले विभिन्न प्रकार के गिद्धों की संख्या पर्याप्त हुआ करती थी। किंतु धीरे-धीरे इनके रहने के योग्य विशालकाय वृक्षों का अभाव तथा प्राकृतिक भोजन की कमी के साथ ही इनके शरीर की कुछ ग्रंथियां दवाई आदि में प्रयोग होने से शिकारियों द्वारा इनका शिकार करने, जैसे कारणों के चलते गिद्धों की संख्या कम होती गई। हालात यहां तक पहुंच गए कि आज इस समतल भू-भाग पर दूरबीन से देखने के बाद भी खोजने पर भी कहीं गिद्ध नजर नहीं आता। लेकिन पहले मृत पशुओं के शव को झुंड के रूप में आकर अपना आहार बनाकर सफाई का काम किया करते थे। जो मानव के साथ ही पर्यावरण के लिए भी बहुत उपयोगी हुआ करता था। लेकिन आज गिद्ध कहीं नजर नहीं आ रहे। ऐसे में अगर कभी कहीं भी कोई गिद्ध दिखाई दे तो स्वाभाविक है कि वह लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन जाता है। ऐसा ही नजारा आज दिखाई दे रहा था, जब कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के गांव गंडुआ मजरा कुआं खेड़ा वजीर आलम में लगभग बेहोशी की हालत में एक गिद्ध पेड़ पर लटका हुआ था। जिसे देखते ही पूरे क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई। कौतूहल बस ग्रामीणों की भीड़ थोड़ी ही देर में वहां जमा हो गई। लोग आपस में तरह-तरह की चर्चाएं कर गिद्धों के बारे में बातें कर रहे थे। इसी बीच किसी ने वन विभाग रेंजर कायमगंज को अवगत कराया।
सूचना मिलते ही वन रेंजर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जहां से उन्होंने पेड़ पर लटके गिद्ध को सावधानीपूर्वक रेस्क्यू करके अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने देखा कि गिद्ध अस्वस्थ है। इसलिए बिना देर किए पड़ोस के पशु चिकित्सालय फैजबाग ले जाकर उसका उपचार कराया। चिकित्सक द्वारा उपचार के बाद बताया गया कि गिद्ध को कोई खास बीमारी नहीं है। केवल भूख-प्यास एवं कड़ाके की सर्दी के कारण वह शिथिल पड़ गया है।
चिकित्सा परामर्श के बाद रेंजर द्वारा गिद्ध को कायमगंज स्थित वन विभाग कार्यालय पर लाया गया। यहां रेंजर ने बताया कि यह पहाड़ी वातावरण में ऊंचाई पर रहने वाली विलुप्त हो रही दुर्लभ यूरेशियन ग्रिफाॅन प्रजापिता का गिद्ध है। उन्होंने बताया कि इस गिद्ध को कानपुर चिड़ियाघर भेजा जाएगा। जिसके लिए औपचारिकताएं पूर्ण की जा रही हैं। साथ ही रेंजर ने कहा कि यह गिद्ध क्षेत्र में अकेला आया या फिर जोड़े के साथ था, इसका भी पता किया जाएगा। उनका कहना है कि गिद्ध की सूंघने एवं देखने की शक्ति अन्य पशु -पक्षियों की तुलना में अधिक होती है। जिस पेड़ पर यह लटका हुआ मिला है उसकी गंध से अनुमान लगाकर जोड़े का पक्षी के बारे में जानकारी अवश्य की जाएगी। यदि ऐसा हुआ तो उसका भी रेस्क्यू करने का प्रयास कर दोनों को साथ कानपुर के चिड़ियाघर में भिजवा दिया जाएगा।
जयपाल/चन्द्रपाल
