Saturday, April 11, 2026
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मियावाकी वन से खिलखिलाएगी कुशीनगर की हिरण्यवती नदी, 1.3 किमी क्षेत्र में फैलेगी हरियाली

-रविवार को जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह करेंगे शिलान्यास

कुशीनगर (हि. स.)। बुद्धकालीन हिरण्यवती नदी को नवजीवन प्रदान करने के लिए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने अभिनव योजना तैयार की है। जनसहभागिता से नदी के 1.3 किमी क्षेत्र के दोनों किनारों पर जापान की मियावाकी तकनीक से सघन वन विकसित किया जाएगा। रविवार को प्रदेश के जल शक्ति मंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह इस परियोजना का शिलान्यास करेंगे।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने पर्यावरण संरक्षण व भू गर्भ जल संचयन को समर्पित इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए बौद्ध भिक्षुओं, उद्यमियों, चिकित्सकों व जनप्रतिनिधियों समेत एनजीओ को जोड़ा है। इस योजना को निजी क्षेत्र के अभियंता नीरज कुमार वर्मा ने तैयार किया है।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने बताया कि जनसहयोग से परियोजना आकार लेगी। मानसून पूर्व पौधरोपण का कार्य कर लिया जाएगा। इस परियोजना में वन विभाग, नगरपालिका, विकास प्राधिकरण समेत कई विभाग जीरो बजट से सहयोग करेंगे। इस परियोजना से न केवल पर्यावरण मजबूत होगा बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मियावाकी वन में शाल, पीपल, बरगद, पाकड़, अर्जुन, जामुन, कदम्ब, पाकड़, पुत्रंजीवा आदि के पौधे रोपित किए जायेंगे।

क्या है मियावाकी तकनीक

यह एक कृत्रिम वन होता है जिसमें पौधों को इस प्रकार रोपा जाता है जो सामान्य पौधों की तुलना में 10 गुना ज्यादा तेजी से वृद्धि करते हैं। इस तकनीक की खोज जापान के हिरोशिमा विश्वविद्यालय के वनस्पति शास्त्री अकीरा मियावाकी ने किया था।

इस विधि में 100 वर्ष में विकसित होने वाले जंगल को 10 वर्ष में ही विकसित किया जा सकता है। यह जंगल दस गुना ज्यादे घने होते हैं। कम क्षेत्र में घने वृक्ष आक्सीजन बैंक का कार्य करते हैं। आबादी क्षेत्र में मियावाकी वन काफी सफल हो रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण व तापक्रम नियंत्रण, कम समय में भूमि को उर्वर बनाना मियावाकी वन की विशेषता है।

गोपाल

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