Tuesday, March 31, 2026
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मालिनी के लोक गीतों के बीच घुली जलेबा, रबड़ी की मिठास

लखनऊ (हि.स.)।” छोटे से, नन्हें से हमार बलमा…” यह लोक गीत लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने सुनाया तो श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। वो सोमवार को लखनऊ में गोमती तट स्थित झूलेलाल वाटिका में चल रहे विकास दीपोत्सव में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत कर रही थीं। उत्सव की पांचवी संध्या उनके नाम रही।

मालिनी की गायिकी में अपनी लोक परम्परा की थाती थी। उन्होंने अपनी गायिकी के बीच बनारस की कचौड़ी गली, जलेबा, रबड़ी चमचम का जिक्र किया। उन्होंने बताया हमे तो यह अब भी अच्छा लगता है। उन्होंने कहा हम लोग बम्बे का पानी पीते थे तब भी स्वस्थ थे।

उन्होंने फिल्म में गाया अपना गाना ” यूं तो प्रेमी पचहत्तर हमारे… सुनाया तो श्रोताओं को इस पर खूब मजा आया। गायिका मालिनी अवस्थी ने गानों के बीच रागों के बारे में भी बताया। इस सम्बंध में बीच-बीच में उन्होंने पुराने फिल्मी गाने ” दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रे, गजब भयो रामा, जुलम भयो रे…का मुखड़ा भी सुनाया। दूसरा गीत ” तूने सारी कमाई गवाई रसिया, अदालत में दावा करूंगी रसिया…..सुनाया तो श्रोताआंें को खूब मौज आई।

कार्यक्रम के बीच उन्होंने युवतियों यह कहकर बुलाया कि यहां हमारे साथ नाचों हम तुम्हे बरफी, लड्डू खिलाऊंगी और बाद में खिलाया भी। एक शक्कर के गुलाबी रंग के गोले बेचने वाली छोटी सी लड़की को बुलाया और उसके सारे गोले खरीद लिए। कार्यक्रम में श्रोताओं ने खूब उठाया।

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