वाराणसी (हि.स.)। महिला महाविद्यालय (एमएमवी), काशी हिंदू विश्वविद्यालय की छात्राओं और शिक्षकों ने छात्र कल्याण पहल के बैनर तले एक विशेष कार्यक्रम के साथ मंगलवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं और समाज के बीच मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता और समर्थन बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों, डॉ. द्वारका प्रसाद और डॉ. तरलोचन सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी दी। पीजीआई चंडीगढ़ में नैदानिक मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. द्वारका प्रसाद ने मनोवैज्ञानिक और व्यवहार संबंधी समस्याओं की जानकारी साझा करने के साथ इससे बचाव के गुर भी बताए। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने उम्र, लिंग, संस्कृति या पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना सभी लोगों के लिए बुनियादी मानव अधिकार के रूप में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को बताया। उन्होंने विभिन्न चुनौतियों और बाधाओं पर भी चर्चा की।
जो लोगों को गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंचने या उनके मानसिक स्वास्थ्य अधिकारों का आनंद लेने से रोकती हैं, जैसे कलंक, भेदभाव, जागरूकता की कमी, संसाधनों की कमी, प्रशिक्षित पेशेवरों की कमी और समर्थन की कमी। विशेषज्ञों ने छात्राओं से आग्रह किया कि वे जरूरत पड़ने पर मदद मांगकर और जब संभव हो मदद की पेशकश करके अपने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण का ख्याल रखें। तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य सामान्य समस्याओं से निपटने के लिए अच्छा खाना, अच्छी नींद, नियमित रूप से व्यायाम करना, ध्यान करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में एक इंटरैक्टिव सत्र भी शामिल था जहां छात्राओं ने प्रश्न पूछे, संदेह दूर किए, अनुभव साझा किए और किसी भी मानसिक स्वास्थ्य मुद्दे पर मार्गदर्शन मांगा जो उन्हें हो या किसी ऐसे व्यक्ति को पता हो जिसे यह समस्या है।
छात्राओं ने एक फिल्म की स्क्रीनिंग का भी आनंद लिया, जहां उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों से संबंधित फिल्म “द पर्क्स ऑफ बीइंग ए वॉल फ्लावर” देखी। कार्यक्रम का संचालन एमएमवी, बीएचयू के छात्र कल्याण पहल की समन्वयक ने किया। कालेज की प्राचार्य प्रोफेसर रीता सिंह ने अतिथियों का आभार जताया।
श्रीधर/दिलीप
