-बिना टिकट के महानंदा एक्सप्रेस ट्रेन से जा रहे थे पश्चिम बंगाल
मीरजापुर (हि.स.)। महानंदा एक्सप्रेस से बंगाल तस्करी करने के लिए ले जा रहे कछुओं के साथ दंपती समेत तीन तस्कर जीआरपी के हत्थे चढ़ गए। तस्करों के पास से सात पिठ्ठू बैग में कुल 208 कछुआ मिले। जीआरपी ने दंपती समेत तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेजा और सभी कछुओं को वन विभाग के हवाले कर दिया।
जीआरपी प्रभारी उदयशंकर कुशवाहा ने गुरुवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि दीपावली व छठ त्योहार के मद्देनजर ट्रेनों में चेकिंग अभियान चला रहे हैं। बुधवार की देर रात करीब ढाई बजे नई दिल्ली से अलीपुरद्वार को जाने वाली महानंदा एक्सप्रेस ट्रेन स्टेशन पर रुकने के बाद जनरल कोच से एक महिला व दो पुरुष बैग लेकर प्लेटफार्म नम्बर 2/3 पर स्थित पानी टंकी के पास उतरकर छिप गए।
इस दौरान जीआरपी ने उन तीनों को पकड़ लिया। उनके पास से कछुओं से भरे सात पिठ्ठू बैग मिले। इसके बाद तीनों को थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ की गई। सोनू कुमार उसकी पत्नी मनीषा और एक अन्य युवक सोनू जो पथरकटा निवासी पकड़ी पोस्ट भादा थाना कोतवाली देहात जिला सुल्तानपुर बताया। उन लोगों ने बताया कि वे कछुआ तस्करी के लिए पश्चिम बंगाल, मालदा टाउन व सिलीगुड़ी ले जा रहे थे।
सुल्तानपुर के जंगलों में मुसहरों से तीस व चालीस रुपये किलो के हिसाब से कछुआ खरीदते थे। बंगाल, मालदा टाउन व सिलीगुड़ी ले जाकर चार से पांच सौ रुपये किलो बेचते थे। तस्करों ने बताया कि त्योहार के मद्देनजर अधिक दाम मिलते हैं, लेकिन बीच रास्ते में पुलिस ने पकड़ लिया।
रेलवे की लापरवाही, बिना टिकट जा रहे थे आरोपित
रेलवे विभाग कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सुरक्षा के लाख इंतजाम कर ले, लेकिन उसके मातहत सचेत होने के बजाय पूरी तरह से लापरवाही बरत रहे हैं। इनकी लापरवाही के चलते महिला समेत तीनों तस्कर बिना टिकट के ही सुल्तानपुर से महानंदा एक्सप्रेस में बैठकर तस्करी के लिए जा रहे थे। इस बीच कोई पूछताछ नहीं की गई। हालांकि यह इनकी पहली घटना नहीं है इसके पूर्व भी वे एक बार ट्रेन से मालदा टाउन तक जा चुके हैं।
