लखनऊ(हि.स.)। महर्षि वाल्मीकि जयंती 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसको लेकर वाल्मीकि समाज में उत्साह दिख रहा है। राजधानी में महर्षि वाल्मीकि के मंदिरों में साफ-सफाई का काम तेजी से चल रहा था। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से भी महर्षि के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर व्याख्यान आयोजित किया जाएगा।
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि कहा गया है। उनकी रचित श्रीमद्रामायण को आदिकाव्य कहा जाता है। कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने भगवान श्रीराम की जीवनगाथा को उनके जीवन से पूर्व ही रच दिया था। इसमें उनके बालपन से लेकर सीता परित्याग, लव और कुश का जन्म और सीता माता के पृथ्वी तक में समा जाने की कथा का संस्कृत श्लोकों में वर्णन है।
महर्षि की जयंती पर पेपरमिल कॉलोनी, वाल्मीकि नगर , इंदिरा नगर, लवकुश सहित अन्य वाल्मीकि बस्तियों में मंगलवार को साफ-सफाई का काम चल रहा था। वाल्मीकि नगर मंदिर में रंग-रोगन का काम चल रहा था। इसके अलावा बिजली की झालरें लगा गई। 20 यानि की बुधवार की शाम को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान में महर्षि के जीवन पर व्याख्यान होगा।
मुख्य वक्ता संस्कृत विद्वान ओम प्रकाश पाण्डेय का व्याख्यान होगा। यह जानकारी संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने दी। उन्होंने बताया कि व्याख्यान के बाद शाम तीन बजे से संस्कृत में कवि सम्मेलन होगा।
