Wednesday, April 1, 2026
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महंगाई को और कम करेगी सरकार, आवश्यक वस्तुओं के दामों पर है नजर: वित्त मंत्री

-वित्त मंत्री ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था अन्य देशों की तुलना में बेहतर और मजबूत

-लोकसभा ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को दी मंजूरी

नई दिल्ली (हि.स)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा को आश्वासन दिलाया कि सरकार महंगाई को कम करने के लिए कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई पर लगातार नजर रखने के साथ उसमें कमी लाने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। इससे नवंबर में खुदरा महंगाई दर 6.77 से घटकर 11 महीने के निचले स्तर 5.88 फीसदी पर और थोक महंगाई दर घटकर 21 महीने के निचले स्तर 5.85 फीसदी पर आ गई है।

वित्त मंत्री ने बुधवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि आम लोगों के लिए महंगाई को और कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। सीतारमण ने कहा कि मंदी का कोई खतरा नहीं है। भारत कम महंगाई के स्तर के साथ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने राजकोषीय घाटे को लेकर कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 6.4 फीसदी के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम होगी।

सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांग में मूल बजट की केवल आठ फीसदी की अतिरिक्त मांग की गई है। वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि आगामी बजट सत्र में चालू वित्त वर्ष के लिए एक बार और अनुदान की अनुपूरक मांगों को पेश किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के समय वित्त वर्ष 2008-09 में वैश्विक आर्थिक संकट के बाद दो अनुपूरक मांगें प्रस्तुत की गई थीं। इसमें बजट के अतिरिक्त 20 फीसदी राशि की मांग रखी गई थी।

वित्त मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने वित्त वर्ष 2022-23 के अनुदान की अनुपूरक मांगों के पहले बैच और वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अनुदान की अतिरिक्त मांगों तथा इससे संबंधित विनियोग विधेयकों को मंजूरी दे दी। अनुपूरक मांग के तहत 3.25 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय के लिए संसद की मंजूरी मांगी थी। वित्त मंत्री ने चर्चा के दौरान विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 500 अरब डॉलर से ज्यादा होने और भारत की आर्थिक वृद्धि को अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तेज गति से बढ़ने की बात भी कही गई है।

प्रजेश शंकर/दधिबल

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