Monday, April 13, 2026
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 मनुष्य और मवेशियों के लिए खतरा है अमेरिकी गाजर घास

मीरजापुर(हि.स.)। गाजर घास (पार्थेनियम) का विस्तार फसलों, मनुष्यों एवं पशुओं के लिए गंभीर संकट बनता जा रहा है। हर वातावरण में उगकर पोषित होने वाला यह एक साकीय पौधा है। एक से डेढ़ मीटर लंबे इसके पौधे का तना रोएंदार शाखायुक्त होता है। गाजर की पत्तियों की तरह इसकी पत्तियां और फल सफेद होते हैं। प्रत्येक पौधा एक से बीस हजार तक अत्यंत सूक्ष्म बीज पैदा करता है। यह पौधा तीन या चार महीने में अपना जीवन चक्र पूरा कर लेता है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सस्यविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि गाजर घास बहुत ही खतरनाक घास है। इसके लगातार संपर्क में आने से मनुष्यों में डरमेटाइटिस, एक्जिमा, एलर्जी, बुखार, दमा आदि बीमारियां हो जाती हैं। पशुओं के लिए भी यह खतरनाक है। इससे उन्हें कई प्रकार के रोग हो जाते हैं एवं दुधारू पशुओं के दूध में कड़वाहट आने लगती है। पशुओं द्वारा अधिक मात्रा में इसे खाने से उनकी मृत्यु भी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि अकृषित क्षेत्रों में शाकनाशी रसायन जैसे ग्लायफोसेट 1.0-1.5 प्रतिशत या मेट्रीब्यूजिन 0.3-0.5 प्रतिशत घोल का फूल आने के पहले छिड़काव करने, गर्मी में खेत की जुताई एवं फसल में उपस्थित इस पौधे की निराई कर इसे नष्ट किया जा सकता है।

जैव विविधता के लिए संकट बने इस गाजर घास के बीज लगभग पांच दशक पूर्व अमेरिका से आयातित गेहूं के साथ भारत आए थे। अब यह देश के अधिकांश भूभाग, खाली स्थानों, अनुपयोगी भूमि, औद्योगिक क्षेत्रों, बगीचों, पार्कों, स्कूलों, सड़कों एवं रेलवे लाइन के किनारों आदि स्थानों में बहुतायत पाए जाते हैं। इसका कुप्रभाव खाद्यान्न, फसलों, सब्जियों और बागवानी पर पड़ता जा रहा है।

गिरजा शंकर

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