औरैया (हि.स.)। मधुमक्खी पालन आय का बहुत बड़ा स्रोत है। मधुमक्खी पालन के लिए यही उपयुक्त समय है। क्योंकि इस समय सरसों बोई जाती है। इससे उत्पन्न होने वाला शहद हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने का भी काम करता है।
जनपद औरैया के अजीतमल क्षेत्र के सेंगनपुर के पास बिहार निवासी राजन उर्फ मुकेश कुमार ने अपने रानी मक्खी के साथ बहुत से डिब्बे लगा रखे हैं। राजन ने हिन्दुस्थान समाचार के साथ बातचीत में कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए एक उपयोगी आय का स्रोत है। इसका यही उपयुक्त समय है। क्योंकि इस समय सरसों बोई जाती है और उसमें फूल आते हैं। इससे परागकण लेकर मधुमक्खी शुद्ध शहद निर्माण करती हैं। यह शहद अन्य शहद से अत्यंत लाभकारी होता है। इसका बाजार में मूल्य 200 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक है।
कहा कि शहद हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का भी काम करता है। किसान इस व्यवसाय के माध्यम से शहद और मोम प्राप्त करने के साथ-साथ रायल जेली उत्पादन, पराग, मौनी विष आदि भी प्राप्त कर सकते है। मधुमक्खी पालन कम उपज वाले खेतों में भी आसानी से करके भारी मात्रा में मोम का उत्पादन किया जा सकता है।
सुनील
