Wednesday, March 4, 2026
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मथुरा : सैकड़ों साल पुरानी अष्टधातु से बनी बेशकीमती ब्रह्मांड बिहारीजी की मूर्ति चोरी

मथुरा(हि.स.)। महावन थाना क्षेत्र के ब्रह्मांड घाट स्थित ब्रह्मांड बिहारी मंदिर में शुक्रवार को बेशकीमती अष्टधातु से बनी प्रचीन बह्मांड बिहारी जी की मूर्ति चोरी हो गयी। द्वापर युग में इसी जगह बालकृष्ण ने जब यहां अपनी मां यशोदा को ब्राह्मण्ड के दर्शन कराएं थे। 

यमुना तट पर सैकड़ों साल पुराने ब्रह्मांड घाट मंदिर से विराजमान ब्रह्मांड बिहारी महाराज की अष्टधातु की बेशकीमती मूर्ति गुरुवार की देर रात को चोरी हो गई। घटना की जानकारी तब हुई जब मंदिर के पुजारी रामशहरण दास प्रतिदिन की तरह शुक्रवार प्रातः ठाकुर ब्रह्माण्ड बिहारी को जगाने ओर उनकी पूजा सेवा करने के लिए आए। जब पुजारी ने मंदिर के बाहर लगे दो दरवाजों में तालों को टूटा देखा और गेट खुला देखा तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पुजारी जब मंदिर के गर्भगृह में पहुंचा तो स्थान से ठाकुरजी की मूर्ति गायब थी। इस पर उसने पुलिस को सूचित किया। 

मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल शुरु कर दी। इससे प्रतीत होता है कि अज्ञात चोर गुरुवार की देर रात को मंदिर के बाहर और गर्भगृह में लगे दो तालों को तोड़ कर दाखिल हुए और प्राचीन बेशकीमती मूर्ति चोरी कर ले गए। 

ब्रह्माण्ड घाट मंदिर के पुजारी रामशरण दास ने बताया कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। इस मंदिर में विराजमान भगवान की मूर्ति अष्टधातु की करीब एक फुट की थी, जो कि बहुत प्राचीन थी। चोर मूर्ति के साथ गो सेवा के लिए मंदिर में रखे करीब 40 हजार रुपये भी चोरी कर ले गए है। 

गौरतलब है कि, ब्रह्मांड घाट भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली है। यहां पर योगीराज भगवान श्री कृष्ण ने मिट्टी खाई थी। मिट्टी खाने पर मां यशोदा ने श्रीकृष्ण को डांटा। कृष्ण ने मिट्टी खाने से इंकार किया। यशोदा ने मुंह खोलकर दिखाने को कहा। तब भगवान श्री कृष्ण के मुख खोलकर मां यशोदा को ब्रह्मांड के दर्शन कराए। ब्रह्मांड देखकर मां यशोदा बेहोश हो गई। तब श्री कृष्ण ने योगमाया का स्मरण किया। मैया को होश में लाने और पहला जैसा करने का आग्रह किया। देवताओं ने पुष्प वर्षा की। देवों ने मिलकर भगवान श्री कृष्ण का ठाकुर ब्रह्मांड बिहारी लाल नाम दिया। यमुना पर बाल लीला होने पर ब्रह्मांड घाट नाम दिया गया। 

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