Tuesday, March 31, 2026
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मथुरा शाही ईदगाह कृष्ण जन्मभूमि मामले में फैसला 24 अप्रैल को

प्रयागराज (हि.स.)। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंध समिति, उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड मथुरा और भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। फैसला 24 अप्रैल को सुनाया जाएगा। मथुरा अदालत में चल रहे मुकदमे की सुनवाई पर पहले ही रोक लगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट एवं अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया।

भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से सिविल जज की अदालत में सिविल वाद दायर कर 20 जुलाई 1973 के फैसले को रद्द करने तथा 13.37 एकड़ कटरा केशव देव की जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान के नाम घोषित किए जाने की मांग की। वादी का कहना था कि जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर 1973 में दिया गया फैसला वादी पर लागू नहीं होगा, क्योंकि वह पक्षकार नहीं था। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की आपत्ति की सुनवाई करते हुए अदालत ने 30 सितंबर 2020 को सिविल वाद खारिज कर दिया। इसके खिलाफ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की तरफ से अपील दाखिल की गई। विपक्षी ने अपील की पोषणीयता पर आपत्ति की।

जिला जज मथुरा की अदालत ने अर्जी मंजूर करते हुए अपील को पुनरीक्षण अर्जी में तब्दील कर दी। पुनरीक्षण अर्जी पर पांच प्रश्न तय किए गए। 19 मई 22 को जिला जज की अदालत ने सिविल जज के वाद खारिज करने के आदेश 30 सितंबर 2020 को रद्द कर दिया और अधीनस्थ अदालत को दोनों पक्षों को सुनकर नियमानुसार आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। इसकी वैधता को इन याचिकाओं में चुनौती दी गई है।

याची के वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना है कि प्लेसेस आप वर्शिप एक्ट 1991 के तहत विवाद को लेकर सिविल वाद पोषणीय नहीं है। इस कानून में सभी पूजा स्थलों की 15 अगस्त 1947 की स्थिति में बदलाव पर रोक लगी है। उन्होंने रामजन्म भूमि विवाद केस के फैसले का हवाला दिया।

आर.एन

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